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मोदी से ज्यादा लोकप्रिय नीतीश, महागठबंधन से आगे एनडीए

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बिहार विधानसभा चुनावों में पहले दौर के मतदान में अब एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है ऐसे में सभी पार्टियों ने प्रचार के लिए अपना जी जान झोंक दी है। हर कोई एक दूसरे से आगे निकलने की जुगत में है।
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लेकिन हाल ही में आए एक सर्वे ने दोनों दलों में बेचैनी पैदा कर दी है। सर्वे के रुझानों को मानें तो चार फीसदी वोट ज्यादा लेकर भाजपा नीत राजग लालू-नीतीश के महागठबंधन से आगे निकलता दिख रहा है।

लेकिन सर्वे यह भी कहता है कि बिहार में आज भी लोकप्रिय चेहरे और मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार की टक्कर में कोई नहीं टिकता। भाजपा के लिए तो चिंताजनक यह भी है कि बिहार में उसकी सबसे बड़ी उम्मीद नरेन्द्र मोदी भी नीतीश से पिछड़ते दिख रहे हैं।
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सीएसडीएस और लोकनीती की ओर से इंडियन एक्सप्रेस के लिए किए गए सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

वोट कटुवा की भूमिका में हैं सपा और एमआईएम

सितंबर के आखिरी हफ्ते में किए गए इस सर्वे के अनुसार अगर उसी समय चुनाव होते तो भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को लालू-नीतीश और कांग्रेस वाले महागठबंधन के मुकाबले 42 फीसदी वोट मिलेंगे। जबकि महागठबंधन के हिस्से में बिहार की 38 फीसदी जनता के वोट आएंगे।

बिहार में तीसरा मोर्चा कहे जा रहे मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी, तारिक अनवर की एनसीपी और पप्पू यादव का गठबंधन वहां वोट कटुवा की भूमिका ही निभाता नजर आ रहा है। सर्वे के अनुसार इस गठबंधन को जनता का सहयोग न के बराबर ही मिलने की संभावना जताई जा रही है।

मायावती की बहुजन समाज पार्टी और लेफ्ट पार्टियों का वोट प्रतिशत पहले के मुकाबले और गिरा है। वहीं आश्चर्यजनक रूप से चुनाव से पहले सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाली असदुद्दीन ओवैसी की एमआईएम भी सर्वे के अनुसार वोटरों पर कोई खास प्रभाव डालती नजर नहीं आ रही है। हालांकि इसे कुछ मुस्लिम वोट मिल सकते हैं।

नीतीश की टक्कर पर कोई नही

सर्वे में सबसे चौंकाने वाली और खास बात ये रही कि बिहार में लोकप्रिय चेहरे के तौर पर आज भी नीतीश कुमार के सामने कोई नहीं टिकता है। बिहार भाजपा में कोई भी नेता न नितीश की लोकप्रियता की टक्कर में है न मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर। दोनों ही मामलों में नीतीश अन्य दलों के नेताओं से आगे हैं।

सर्वे से सबसे ज्यादा झटका तो भाजपा को लगा है जिसकी सबसे बड़ी उम्‍मीद नरेन्द्र मोदी भी लोकप्रियता के मामले में नीतीश से पिछड़ रहे हैं। भाजपा की चिंता इसलिए भी अधिक है कि डेढ़ साल पहले जिस चेहरे के तौर पर लोकसभा में एकतरफा जीत हासिल करने के बाद पार्टी ने कई राज्यों में भी मोदी के नाम पर सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी उसका जादू नीतीश कुमार के सामने फीका पड़ता दिख रहा है।

सर्वे में जहां नीतीश कुमार 46 फीसदी लोगों की पसंद रहे वहीं मोदी उनसे पीछे 45 फीसदी लोगों की। हालांकि वोट फीसदी का अंतर यह बेशक एक प्वाइंट का दिख रहा हो लेकिन ये इसलिए महत्वपूर्ण है कि पूर्व में हुए सभी सर्वेक्षणों में मोदी लोकप्रिय चेहरे के तौर पर नितीश से आगे ही दिख रहे थे।

मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर बात करें तो नीतीश कुमार 27 फीसदी लोगों की पसंद हैं जबकि भाजपा के सीएम चेहरे माने जा रहे सुशील मोदी उनसे लगभग आधे 14 फीसदी की। लालू राबड़ी को मुख्यमंत्री के तौर पर देखने वालों की तादाद 12 फीसदी के करीब है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी 5 फीसदी और केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान मात्र 4 फीसदी लोगों की पसंद हैं।
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उच्च, अति पिछड़ा और दलितों में भाजपा की मजबूत पकड़

सर्वे के अनुसार भाजपा गठबंधन को उच्च जातियों और अति पिछड़ा वर्ग के अलावा काफी संख्या में दलित वोट भी मिलने की उम्‍मीद जताई गई है। इनमें भी खासकर पासवानों का रुझान काफी कुछ भाजपा गठबंधन की ओर ही है।

दूसरी ओर महागठबंधन की उम्‍मीद काफी हद तक यादव, कुर्मी, कोरी और मुस्लिम जुगलबंदी पर ही टिकी हुई है। क्षेत्रवार वोट के मामले में जहां शहरी इलाकों में भाजपा गठबंधन लालू-नीतीश को बीस फीसदी से ज्यादा वोटों के दम पर काफी पीछे छोड़ता दिख रहा है वहीं ग्रामीण इलाकों में अभी भी लालू यादव और नीतीश कुमार का ही जलवा है।

सर्वे की मानें तो बिहार के मिथिला, तिरहट और सीमांचल के पूर्व क्षेत्रों में महागठबंधन का प्रभाव है वहीं भाजपुर और मगध क्षेत्र में एनडीए सबसे आगे है।
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