कमल के फूल में रंग भरते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को चित्रकार के रूप में दिखे। उन्होंने हाथ में कूची थामी और कैनवास पर रंग बिखेरे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना के गांधी मैदान में आयोजित पुस्तक मेले के उद्घाटन के बाद पद्मश्री बौआ देवी के बनाए कमल के फूल में जैसे ही रंग भरा, राजनीतिक पंडित इसके राजनीतिक अर्थ तलाशने लगे। वैसे नीतीश कुमार ने कहा कि बिहारियों का मन और मिजाज पढ़ने का होता है और ये हमेशा से उनकी पहचान रही है।
दरअसल, नीतीश से पूर्व उस कैनवास पर पद्म पुरस्कार से सम्मानित बौआ देवी ने मिथिला शैली में एक कमल की कलाकृति बनाई थी, नीतीश कुमार ने उसी कमल के फूल में कूची से रंग भरा। मिथिला में कमल को पुरैन कहा जाता है और कोहबर में पुरैन के चित्र वंश निरंतरता के लिए बनाए जाते हैं।
इससे पूर्व उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा कि असल बिहारी का मिजाज पढ़ना ज्ञान देना और ज्ञान लेना होता है, जिसका उदाहरण हाल के दिनों में बिहार ने प्रकाश पर्व, शराबबंदी औैर मानव श्रृंखला के जरिए लोगों को देने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के बारे में लोगों का विचार पहले कुछ और था, लेकिन ये मिजाज अब बदल रहा है।