बिहार में सरकार चला रहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में अब सब कुछ ठीक-ठाक नहीं दिख रहा है। ऐसा लग रहा है कि सरकार के मांझी ने विपक्ष की पतवार थाम ली है। तीन दिनों पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह कह चुके हैं कि भारतीय जनता पार्टी की वजह से राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है। और अब सरकार के अहम सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ही नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
इससे पहले जीतन राम मांझी ने राजद नेता और लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को पुत्र समान और बिहार का ओजस्वी युवा नेता भी कहा है। तेजस्वी यादव के लिए जीतन राम मांझी के ट्वीट के मायने अभी तालाशे से ही जा रहे थे कि जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े कर सरकार को मुश्किलों में डाल दिया है।
जीतन राम मांझी दलों और गठबंधनों को लगातार बदलते रहने वाले नेता हैं और अब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह एक बार फिर लालू प्रसाद के करीब होते जा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी मांझी ने पूर्ण शराबबंदी कानून को कटघरे में खड़ा करते हुए थोड़ी-थोड़ी पीने की सिफारिश की थी। अब नीतीश कुमार के इस कानून पर सवाल खड़े कर वह सरकार से अलग सुर अलापने लगे हैं।
जीतन राम मांझी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए बधाई परंतु अनुरोध है कि वैसे गरीब जो शराबबंदी कानून के तहत छोटी गलती के लिए जेल में बंद हैं उनकी जमानत की व्यवस्था सुनिश्चित करवाएं। परिवार के मुखिया के जेल में बंद रहने के कारण उनके बच्चे भूखे हैं। विपक्ष ने भी अब इसे बड़ा मुद्दा बनाया है। हाल ही में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने भी मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े किए हैं। जीतन राम मांझी के इस ट्वीट को कांग्रेस की चिट्ठी का समर्थन माना जा रहा है।