शुक्रवार को मुख्यमंत्री समाधान यात्रा के क्रम में अररिया में थे।
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"कई जगह लोगों ने बताया है कि बिजली बिल ज्यादा दे रहा है। ऐसा कोई गड़बड़ कर रहा है तो पूरा जांच कराएंगे। मुख्य सचिव से लेकर एक-एक अधिकारी को कह दिया है कि पूरे तौर पर देखिए। ऐसा कोई गड़बड़ किया है तो जांच कराइए।"- करीब दो साल से बिजली बिल को लेकर परेशान बिहार के लोगों को समाधान यात्रा के दौरान अररिया में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बयान से कुछ उम्मीद जगेगी। पटना में प्रीपेड मीटर की लांचिंग के साथ ही इस समस्या को लेकर लोग अलग-अलग फोरमों पर बात उठा रहे थे। कुछ लोग कोर्ट तक गए, लेकिन अधिकारी ऐसी गड़बड़ी से इनकार करते रहे। पटना में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता के बाद जैसे-जैसे बिहार के बाकी शहरों में यह जाता गया, ज्यादा चार्ज लेने की जानकारी सामने आने लगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री को अररिया में लोगों ने इसका समाधान करने कहा तो उन्होंने जांच की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले से ही कहा गया है कि बिजली के उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल नहीं आना चाहिए। घूमने के दौरान जो समस्याएं आती हैं उसका समाधान कराना ही हमलोगों की यात्रा का उद्देश्य है। अभी हमलोग यह दावा नहीं कर सकते हैं कि सभी काम हो ही गया है। लेकिन, बहुत कुछ हुआ है। जहां कहीं भी हमलोग जा रहे हैं तो लोगों को लगता है कि यह भी काम होना चाहिए तो लोग अपनी बात हमारे सामने रखते हैं।
केके पाठक की गालियों की जांच भी मुख्य सचिव करेंगे
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सीनियर आईएएस केके पाठक की गालियों वाला मामला उनके संज्ञान में आया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से इस केस की पूरी जांच कराने की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि कल शाम में इसकी जानकारी मिली है और जांच कराने के लिए कहा है। जांच में जो बातें आएंगे, उस हिसाब से फैसला लिया जाएगा कि क्या करना है। एक-एक चीज को देखकर जांच होगी। इस मामले को देखा जा रहा है।
कुशवाहा के सवाल पर कहा- उस बारे में मत सोचिए
जदयू के कुछ नेताओं द्वारा पार्टी को कमजोर बताये जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन सब बातों को छोड़ दीजिए। उन सबकी चिंता मत कीजिए, इसका कोई मतलब नहीं है। कुछ लोगों की आदत है इधर-उधर करने की उसे करने दीजिए। हमने बार-बार लोगों को कह दिया है कि इन सब चीजों पर मत सोचिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान लोगों से हमलोग सीधा संवाद कर रहे हैं। जो कोई भी अपनी बात कहना चाहता है उसकी बातों को हमलोग सुनते हैं। उनलोगों का ज्ञापन भी हमलोग लेते हैं। यात्रा के दौरान पैदल चलने के दौरान हमलोग सभी की बातों को सुनते रहते हैं। दूर से भी कोई व्यक्ति आवाज लगाता है तो हमलोग रुककर उसे पास बुलाकर उसकी बातों को सुनते हैं। कोई अपनी समस्या बताता है तो उसकी बातों को गौर से सुना जाता है। इसको लेकर हम अधिकारियों को निर्देश भी देते हैं।