नौ फर्जी परीक्षार्थियों में कौन-कौन शामिल?
जांच में नौ फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस छात्र, बीएचयू की नर्सिंग छात्रा, आयुर्वेद कॉलेज की छात्रा और मेडिकल इंटर्न शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, एएनएमसीएच गया, एम्स रायबरेली, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली, सरकारी मेडिकल कॉलेज, सतना, मध्य प्रदेश, बीएचसू, नर्सिंग समेत अन्य कॉलेज से जुड़े छात्र शामिल हैं। इनकी पहचान मंतोष, विवेक, हिमांशु, सौरभ, पुनम, अमन, रौशन, चंचल और जितेंद्र के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, यह लोग वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
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एक मूल और दो सहयोगी को भी किया गया गिरफ्तार?
मामले में एक मूल अभ्यर्थी और दो सहयोगियों की भी पहचान की गई है। सहयोगियों में गया स्थित एएनएमसीएच और पावापुरी स्थित बीएमआईएमएस के एमबीबीएस छात्र शामिल हैं, जिन पर पूरे नेटवर्क के संचालन और डमी अभ्यर्थियों की व्यवस्था कराने का आरोप है। इनकी पहचान संजीत, रंजीत और अर्पित के रूप में हुई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठित तरीके से संचालित परीक्षा माफिया का नेटवर्क है, जिसमें वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की साजिश रची गई थी। फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के सहारे इन लोगों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
18 बायोमेट्रिक कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मियों की कथित संलिप्तता को लेकर हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन सुपरवाइजर समेत कुल 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को आरोपी बनाया है। इनमें लखीसराय और आसपास के जिलों के कई कर्मचारी शामिल हैं। इनकी पहचान बादल, कृष्णा, अंकित, मुकुंद, उदय, अखिलेश, मयंक, विशाल, राकेश, अंकित, मोहित, सुदर्शन, अमलेश, अदिति, घनश्याम, शंकर, आर्यन, चंदन के रूप में हुई। इन पर आरोप है कि बायोमेट्रिक जांच प्रक्रिया में हेरफेर कर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया। पुलिस पूरे गिरोह के नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।