बिना चेहरे के बिहार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरी भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरपूर उपयोग करने वाली है। दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह बिहार चुनाव में पीएम मोदी की भूमिका को लेकर पार्टी में किसी प्रकार का ऊहापोह नहीं है।
दरअसल भाजपा पीएम मोदी के सहारे न केवल चुनाव को विकास केंद्रित बनाए रखना चाहती है, बल्कि महागठबंधन के सामाजिक न्याय से जुड़े जातिगत समीकरण को भी पीएम मोदी की पिछड़ी जाति के नेता की छवि से धो देना चाहती है।
इसके अलावा सूबे के हर विधानसभा क्षेत्र में 18-25 साल के युवाओं की अच्छी खासी संख्या को पार्टी के पक्ष में मोड़ने के लिए भी भाजपा के रणनीतिकार पीएम मोदी के भरोसे ही हैं।
यही कारण है कि सूबे को चार भागों में बांट कर हर भाग में एक रैली संपन्न कराने के बाद अब पार्टी की योजना पीएम मोदी की हर कमिश्नरी में एक रैली कराने की है।
बिहार में दिल्ली वाला हाल न होने देने की तैयारी
दिल्ली विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की भूमिका पर ऊहापोह की बड़ी सियासी कीमत चुकाने वाली भाजपा बिहार विधानसभा चुनाव में इस मामले में सतर्क है।
पार्टी इस चुनाव में न केवल हर कीमत पर पीएम मोदी को ही अपना चेहरा बनाए रखना चाहती है, बल्कि पीएम मोदी के सहारे ही चुनाव प्रचार को विकास बनाम अराजकता का रंग देने की कोशिश में है।
पीएम मोदी की चार रैलियों के बाद कराए गए पार्टी के आंतरिक सर्वे में चुनाव प्रचार को विकास केंद्रित बनाए रखने में भरपूर मदद मिलने की बात सामने आई है।
चुनावी रणनीति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक आचार संहिता लागू होने के बाद पीएम मोदी की आधा दर्जन रैलियां तय हैं। परिस्थितियों के अनुरूप रैलियों की संख्या में और इजाफा किया जा सकता है।
खासतौर से चुनाव प्रचार खत्म होने के दिन या इससे ठीक एक दिन पहले पार्टी की योजना पटना के गांधी मैदान में पीएम की बड़ी रैली कराने की है।
पप्पू यादव आएंगे काम
भाजपा ने राजद से निष्कासित सांसद पप्पू यादव से हालांकि प्रत्यक्ष रूप से दूरी बना ली है, मगर पार्टी की रणनीति में इस सांसद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक पप्पू चुन चुन कर राजद और जदयू के बागी उम्मीदवारों को अपनी पार्टी से टिकट देंगे। ऐसे में कोसी क्षेत्र जहां भाजपा मोदी की आंधी के बावजूद लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खोल पाई थी, वहां महागठबंधन का वोट कटने की स्थिति में लाभ में रहेगी।
इसके अलावा पार्टी को कोसी क्षेत्र में मुस्लिमों के फायरब्रांड नेता बनकर उभरे सांसद असादुद्दीन ओवैसी के करिश्मे से भी सियासी लाभ की उम्मीद है।