नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति जॉर्ज यो ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका आरोप है कि जानकारी दिए बिना ही विश्वविद्यालय के नेतृत्व में बदलाव कर दिया गया। बता दें कि दो दिन पहले नए बोर्ड का गठन किया गया था। जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को जगह नहीं दी गई। इस बोर्ड में भारत की तरफ से पूर्व नौकरशाह एन के सिंह को चुना गया है। वह बीजेपी सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। उनके अलावा केंद्र सरकार द्वारा तीन और नामों को दिया गया है।
कुलपति यो ने विश्वविद्यालय के बोर्ड को भंग करने के बाद उसके पुनर्गठन का विरोध भी किया है। यो के मुताबिक विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को प्रभावित किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नोटिस तक नहीं दिया गया।
यिओ के बयान के अनुसार, ”जब मुझे जुलाई 2015 में चांसलर नियुक्त किया गया था तब मुझे कहा गया था कि एक संशोधित एक्ट के तहत गवर्निंग बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस पर विदेश मंत्रालय की ओर से मुझ से राय भी मांगी गई थी। संशोधित एक्ट आने पर वर्तमान प्रक्रिया की कई कमियों को दूर किया जा सकता था।”
येओ ने कहा कि यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया। जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था, तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता रहेगी। अब ऐसा प्रतीत नहीं होता। उन्होंने कहा कि बड़ी दुख के साथ मैंने विजिटर को चांसलर के रूप में अपना त्यागपत्र भेज दिया है।