पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक चुनाव लड़ने वाले और अपनी अलग पहचान बनाने वाले भागलपुर के समाजसेवी नागरमल बाजोरिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को पटना में उनका निधन हो गया। शुक्रवार सुबह भागलपुर में उनका अंतिम संस्कार होगा। चुनावी रिकॉर्ड के साथ-साथ गरीबों, बेटियों की शादी और शिक्षा के लिए किए गए उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा।
पटना में निधन, भागलपुर में होगा अंतिम संस्कार
नागरमल बाजोरिया का गुरुवार को पटना में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर गुरुवार शाम छह बजे भागलपुर स्थित उनके पैतृक आवास एमपी त्रिवेदी निवास लाया जाएगा। शुक्रवार सुबह आठ बजे भागलपुर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अपने पीछे वे चार पुत्र,सतीश, अजय, दिलीप तथा एक बेटी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
चुनाव लड़ना बना दी थी पहचान
नागरमल बाजोरिया को देशभर में 'धरतीपकड़' के नाम से जाना जाता था। उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक लगभग हर स्तर का चुनाव लड़ा। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 252 चुनावों में प्रत्याशी के रूप में भाग लिया और राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल किया। चुनाव जीत से ज्यादा लोकतंत्र में भागीदारी उनका उद्देश्य माना जाता था।
समाज सेवा में भी छोड़ी अमिट छाप
भागलपुर के समाजसेवी चांद झुनझुनवाला ने कहा कि नागरमल बाजोरिया सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज सेवा के लिए भी हमेशा याद किए जाएंगे। गरीब परिवारों की मदद, जरूरतमंद कन्याओं के विवाह, महिलाओं की सहायता और बच्चों की शिक्षा के लिए उनका योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने जीवनभर जरूरतमंद लोगों की सहायता को अपनी प्राथमिकता बनाया।
भागलपुर ने खोई अपनी एक अनोखी पहचान
चांद झुनझुनवाला ने कहा कि नागरमल बाजोरिया जैसे व्यक्तित्व विरले होते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके नाम कई अनोखे रिकॉर्ड दर्ज हैं और उनका नाम गिनीज बुक तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि भागलपुर ने अपनी एक ऐसी धरोहर खो दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
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लोकतंत्र और सेवा की मिसाल रहेंगे बाजोरिया
उनके करीबियों का कहना है कि नागरमल बाजोरिया का जीवन संदेश देता है कि लोकतंत्र में भागीदारी और समाज सेवा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। चुनावी मैदान में उनकी निरंतर मौजूदगी और समाज के कमजोर वर्गों के लिए किए गए कार्य उन्हें हमेशा यादों में जीवित रखेंगे। उनके निधन से भागलपुर ही नहीं, पूरे बिहार ने एक अनोखा व्यक्तित्व खो दिया है।