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Bihar: थाना की बाउंड्री के अंदर की जमीन की रजिस्ट्री क्या है मामला? जानिए सरकार की ओर कौन-क्या कह रहे?

Sat, 30 May 2026 01:39 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण

सार

Bihar: पूर्वी चंपारण के झरौखर थाना क्षेत्र में नए थाना भवन की बाउंड्री के अंदर स्थित करीब पांच कट्ठा जमीन की कथित रजिस्ट्री और कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने थाना परिसर की भूमि को ही अपने कब्जे में लेने की साजिश रची है।
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थाना की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वी चंपारण में भू-माफियाओं के निशाने पर किसी आम आदमी की जमीन नहीं, बल्कि खुद थाना की जमीन आ गई। जिस थाना में लोग जमीन विवाद और कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचते हैं, उसी थाना परिसर की जमीन की कथित रजिस्ट्री होने का आरोप लगा है।  मामला भारत-नेपाल सीमा से सटे झरौखर थाना क्षेत्र का है। यहां बिहार सरकार द्वारा 61 डिसमिल जमीन खरीदकर तथा 19 डिसमिल गैरमजरूआ जमीन को मिलाकर नए थाना भवन का निर्माण कराया जा रहा है। बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा यह भवन अंतिम चरण में है। चारों ओर बाउंड्री वॉल बन चुकी है और जल्द ही थाना शिफ्ट होने की तैयारी थी। लेकिन, इसी बीच स्थानीय भू-माफियाओं पर थाना परिसर की बाउंड्री के अंदर की करीब पांच कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप लगा है। 

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'दो साल पहले हुई थी मापी'
विभागीय कार्यपालक अभियंता ने बताया कि थाना भवन निर्माण शुरू होने से पहले तत्कालीन एसडीपीओ, अंचलाधिकारी, एसडीएम और थानाध्यक्ष की मौजूदगी में जमीन की विधिवत मापी हुई थी। पिलर लगाए गए थे और उसी आधार पर नक्शा स्वीकृत कर निर्माण शुरू कराया गया था। ऐसे में अब दो साल बाद दोबारा जमीन की मापी कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने आगे कहा, 'अब अंचलाधिकारी किस आधार पर दोबारा मापी करा रहे हैं, इसकी जानकारी हमें नहीं है। वहीं सरकारी जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई, यह भी जांच का विषय है।'

जानिए अंचलाधिकारी ने क्या कहा?
इस पूरे प्रकरण को लेकर अंचलाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि जब तक उक्त भूमि का मापी नहीं हो जाएगी तब तक यह नहीं क्लियर हो पाएगा कि उक्त भूमि रैयती है कि सरकारी है। एक बार मापी हो जाए उसके बाद ही हम कुछ कह सकेंगे। मापी सभी वरीय अधिकारियों को सामने होगी। कार्यपालक अभियंता क्या कहता है? उस पर हमको कुछ नहीं कहना है। उन्होंने कहा कि आवेदक द्वारा मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। इसमें आवेदक का शपथ पत्र भी संलग्न है। कुछ विवाद की बात सामने आई है। कुछ रैयती जमीन को घेरने की बात सामने आ रही है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कार्रवाई जा रही है। कार्यपालक अभियंता अपनी साइट मैप के अनुसार, जमीन की मापी करवा लें ताकि विवाद की स्थिति नहीं रहे।
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'थाना अध्यक्ष ने मना किया था मापी कराने से'
अंचलाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि आवेदक ने भूमि मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ-साथ पत्र के माध्यम से भी आवेदन दिया था। आवेदन के साथ एक शपथ पत्र संलग्न है, जिस पर अंगूठे का निशान अंकित है। अब यह जांच का विषय बन गया है कि उक्त अंगूठे का निशान किसका है तथा मापी के लिए आवेदन वास्तव में किस व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया गया था। मामले के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय से भी पत्र प्राप्त हुआ था, जिसके आलोक में भूमि मापी की कार्रवाई प्रारंभ की गई थी। परंतु थाना अध्यक्ष ने यह कहते हुए मापी कराने से इनकार कर दिया कि उनके वरीय अधिकारी के निर्देशानुसार संबंधित भूमि की मापी नहीं की जानी है। बताया गया कि थाना अध्यक्ष द्वारा दोनों अवसरों पर मापी कार्य से मना किए जाने के बाद अंचल कर्मियों को बिना मापी किए ही लौटना पड़ा।

अंचलाधिकारी के हड़ताल अवधि में बाउंड्री का निर्माण हुआ
बताया जा रहा है कि विवादित भूमि का मामला वर्ष 2022 से जुड़ा हुआ है। उस समय भू-अर्जन कार्यालय द्वारा रैयत के बड़े प्लॉट से पूरब-पश्चिम दिशा में आयताकार स्वरूप में 61 डिसमिल भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया था तथा भूमि का चिह्नीकरण भी किया गया था। हालांकि बाद में रजिस्ट्री के दौरान रैयत द्वारा उत्तर-दक्षिण दिशा में आयताकार भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। जानकारी के अनुसार BPBCC द्वारा तैयार किया गया प्रस्तावित साइट प्लान रजिस्ट्री डीड के अनुरूप था और निर्माण विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी भी थी। लेकिन, अंचलाधिकारी के हड़ताल अवधि में रहने के दौरान स्वीकृत साइट प्लान से अलग हटकर बाउंड्री निर्माण कर लिया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर अंचल अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस निर्माण की अनुमति या प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है।

वास्तविक स्थिति और स्वामित्व का निर्धारण कैसे होगा?
अधिकारियों का कहना है कि भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व का निर्धारण केवल विधिवत मापी के बाद ही संभव हो सकेगा। मापी से यह स्पष्ट हो पाएगा कि जिस अतिरिक्त भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, वह रैयती भूमि है या सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि का हिस्सा है। अंचल कार्यालय का कहना है कि विवाद के समाधान के लिए लगातार मापी कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय थाना द्वारा वरीय अधिकारियों के मौखिक निर्देश का हवाला देकर बताया गया कि वरीय अधिकारी की उपस्थिति में ही मापी कार्य किया जा सकता है।
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