अनुभव ने बताया कि वह बचपन में नानी के साथ ज्यादा समय बिताते थे। नानी कहानियां और कविताएं सुनाती थीं। वह उनसे प्रेरित हुए। फिर कविता पर काम करना शुरू किया। आज यही मेहनत रंग लाई और मेरे पंख को उड़ान दी है। उन्होंने मुजफ्फरपुर में ही रहकर 2020 में मैट्रिक पास किया। फिर 2022 में इंटर पास की। अब वह वैशाली के एक कॉलेज से डीएलएड की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें शिक्षक बनना है और बच्चों को पढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना चाहते हैं।
अनुभव ने बताया कि कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान वह काफी सक्रिय हुए और कविताएं लिखना शुरू की, काफी मेहनत की। एक किताब लिखी, उसका नाम चिड़ियों का स्कूल है। उसमें उन्होंने मां पर एक कविता लिखी, जिसे एनसीईआरटी ने पसंद किया है। उन्हें एनसीईआरटी की ओर से उन्हें उनकी कविता को स्कूल की किताब में शामिल करने का पत्र मिला है। उसमें बताया गया है कि उनकी कविता चुनी गई थी।
अनुभव ने बताया कि कविता कक्षा दूसरी की सारंगी में चौथे नंबर पर है। पेज संख्या 14 है और आज वह कविता स्कूल के बच्चे पढ़ रहे हैं। अनुभव का मानना है कि मां शब्द से बड़ा दुनिया में कोई शब्द नहीं है। मां आपसे हमेशा निस्वार्थ प्यार करती है। चाहे आप जैसे भी हों। वह हमेशा आपका साथ देती है। आपके साथ खड़ी रहती है। मेरी मां भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं। पिता भी करते हैं। इसलिए मां के लिए कविता लिखी थी।
अनुभव को उनकी रचना ‘चिड़ियों का स्कूल’ के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। घर में मां और नानी के साहित्यकार होने की वजह से और उनकी ललक भी साहित्य की तरफ बढ़ी इसके साथ अनुभव संगीत को भी सीखते रहे हैं। अनुभव कहते हैं कि वे डीएलएड की पढ़ाई के साथ सीटेट की भी तैयारी कर रहे हैं, आगे चलकर वह शिक्षक बनना चाहते हैं।