फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: आधा शरीर काम नहीं करता, पर BPSC शिक्षक बनना चाहते हैं अनुभव; इनकी कविता भी स्कूलों में पढ़ा रहा NCERT

Sat, 17 Feb 2024 04:55 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Muzaffarpur Hindi News: अनुभव ने बताया कि कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान वह काफी सक्रिय हुए और कविताएं लिखना शुरू की, काफी मेहनत की। एक किताब लिखी, उसका नाम चिड़ियों का स्कूल है। उसमें उन्होंने मां पर एक कविता लिखी, जिसे एनसीईआरटी ने पसंद किया है।
विज्ञापन
साहित्यकार अनुभव तथा उनकी किताब चिड़ियों का स्कूल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार के मुजफ्फरपुर के एक युवक अनुभव की लिखी एक कविता NCERT में शामिल हो गई है। उनका आधा शरीर काम नहीं करता है, लेकिन अपनी तीक्ष्ण बुद्धि की बदौलत उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है। वह अब BPSC का शिक्षक बनना चाहते हैं। अनुभव कहते हैं कि मंजिल उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

विज्ञापन


दरअसल, अनुभव मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं और उनकी कहानी काफी दिलचस्प है। उनका आधे से ज्यादा शरीर काम नहीं करता है। फिर भी उन्हें अब किसी की पहचान की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। जानकारी के मुताबिक, अनुभव को सेरेब्रम डिसऑर्डर है, जिस कारण ही उनका आधे से ज्यादा शरीर काम नहीं करता। इसके बावजूद वह बीपीएससी के शिक्षक बनना चहते हैं और इसके लिए खूब मेहनत भी कर रहे हैं। यही नहीं, इनकी लिखी हुई एक कविता को NCERT भी सलाम करता है। उनकी लिखी कविता भी देश भर के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जाती है। अनुभव लेखक और साहित्यकार भी हैं।

विज्ञापन

मां कविता - फोटो : अमर उजाला
अनुभव ने बताया कि वह बचपन में नानी के साथ ज्यादा समय बिताते थे। नानी कहानियां और कविताएं सुनाती थीं। वह उनसे प्रेरित हुए। फिर कविता पर काम करना शुरू किया। आज यही मेहनत रंग लाई और मेरे पंख को उड़ान दी है। उन्होंने मुजफ्फरपुर में ही रहकर 2020 में मैट्रिक पास किया। फिर 2022 में इंटर पास की। अब वह वैशाली के एक कॉलेज से डीएलएड की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें शिक्षक बनना है और बच्चों को पढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना चाहते हैं।

अनुभव ने बताया कि कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान वह काफी सक्रिय हुए और कविताएं लिखना शुरू की, काफी मेहनत की। एक किताब लिखी, उसका नाम चिड़ियों का स्कूल है। उसमें उन्होंने मां पर एक कविता लिखी, जिसे एनसीईआरटी ने पसंद किया है। उन्हें एनसीईआरटी की ओर से उन्हें उनकी कविता को स्कूल की किताब में शामिल करने का पत्र मिला है। उसमें बताया गया है कि उनकी कविता चुनी गई थी।
 
अनुभव ने बताया कि कविता कक्षा दूसरी की सारंगी में चौथे नंबर पर है। पेज संख्या 14 है और आज वह कविता स्कूल के बच्चे पढ़ रहे हैं। अनुभव का मानना है कि मां शब्द से बड़ा दुनिया में कोई शब्द नहीं है। मां आपसे हमेशा निस्वार्थ प्यार करती है। चाहे आप जैसे भी हों। वह हमेशा आपका साथ देती है। आपके साथ खड़ी रहती है। मेरी मां भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं। पिता भी करते हैं। इसलिए मां के लिए कविता लिखी थी।

अनुभव को उनकी रचना ‘चिड़ियों का स्कूल’ के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। घर में मां और नानी के साहित्यकार होने की वजह से और उनकी ललक भी साहित्य की तरफ बढ़ी इसके साथ अनुभव संगीत को भी सीखते रहे हैं। अनुभव कहते हैं कि वे डीएलएड की पढ़ाई के साथ सीटेट की भी तैयारी कर रहे हैं, आगे चलकर वह शिक्षक बनना चाहते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें