डीईओ कार्यालय एवं डीईओ के द्वारा निकाला गया पत्र
मोतिहारी जिले के ढाका प्रखंड में शिक्षा विभाग में खेल सामग्री की खरीद को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। सरकारी स्कूलों के लिए भेजी गई राशि में अधिकारियों और सप्लायर की मिलीभगत से बंदरबांट का आरोप लगाया जा रहा है।
बिना सामान खरीदे राशि की निकासी
जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार ने विद्यालयों में खेल सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक स्कूलों को 5 हजार, मध्य विद्यालयों को 10 हजार और उच्च विद्यालयों को 25 हजार रुपये की राशि दी थी। निर्देश था कि हेडमास्टर, एक वरीय शिक्षक और खेल शिक्षक मिलकर आवश्यक सामग्री की खरीदारी करेंगे, लेकिन आरोप है कि कई स्कूलों में बिना सामान खरीदे ही राशि की निकासी कर ली गई।
फर्जी पीपीए के जरिए निकाले गए पैसे
ढाका प्रखंड के कई विद्यालयों में कथित तौर पर फर्जी पीपीए (पेमेंट प्रोसेस) काटकर पैसे निकाल लिए गए। इस पूरे मामले में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के अकाउंटेंट और पूर्व सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े डाटा ऑपरेटर की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
85 प्रतिशत विद्यालयों में भुगतान प्रक्रिया पूरी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किया है कि बिना खेल सामग्री खरीदे कोई भी पीपीए नहीं काटा जाए। हालांकि, उनके आदेश से पहले ही करीब 85 प्रतिशत विद्यालयों में भुगतान प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
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जांच के लिए टीम गठित
डीईओ ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है और स्पष्ट कहा है कि किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।