सीतामढ़ी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में ब्लड प्रेशर से पीड़ित छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने में देरी हुई, क्योंकि कॉलेज में एम्बुलेंस सुविधा नहीं थी। प्रिंसिपल की कार उपलब्ध न कराने और अस्पतालों में इलाज में देरी के कारण छात्रा की मौत हो गई।
सीतामढ़ी के इंजीनियरिंग कॉलेज एसआईटी (SIT) में अंतिम सत्र के आख़िरी सेमेस्टर में पढ़ रही छात्रा मेधा पराशर की मौत बीते गुरुवार को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाए जाने की वजह से हो गई। मेधा को पहले से ब्लड प्रेशर की समस्या थी। हॉस्टल में अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं हुआ। कॉलेज में 2016 से संचालित होने के बावजूद एक भी एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है।
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जब प्रिंसिपल सुनील कुमार से कार की मांग की गई, तो उन्होंने अपनी कार से लड़की को अस्पताल पहुंचाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि कार कहीं गंदी न हो जाए। इसके बाद दूसरी गाड़ी मंगवाई गई, लेकिन इस क्रम में देर हो गई और मेधा सदर अस्पताल पहुंचने में काफी समय गंवा चुकी थी।
सदर अस्पताल में भी डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई। पहले सीटी स्कैन करने से मना किया गया और इलाज में देर की गई। इसके बाद उसे पीएमसीएच पटना के लिए रेफर कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी छात्रा के साथ नहीं गया। एक सहपाठी छात्र ने एम्बुलेंस से उसे पटना के लिए भेजा।
सीतामढ़ी से पटना के लिए निकली एम्बुलेंस ने मेधा को एसकेएमसीएच मुजफ्फ़रपुर में उतार दिया और आगे जाने से मना कर दिया। इसके बाद प्राइवेट एम्बुलेंस की व्यवस्था करने में भी मुजफ्फ़रपुर में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कठिन प्रयास के बाद मेधा को पीएमसीएच पटना पहुंचाया गया, लेकिन वहाँ उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। इस घटना के बाद कॉलेज के छात्रों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रिंसिपल सुनील कुमार से इस्तीफे की मांग कर दी। छात्रों ने प्राचार्य पर व्यवस्थाओं की कमी और छात्रों की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया।
सोशल मीडिया पर घटना की खबर फैलने के बाद शनिवार सुबह सदर एसडीपीओ और एसडीएम कॉलेज पहुंचे और छात्रों को शांत करने की कोशिश की। सदर एसडीपीओ राजीव कुमार ने प्रिंसिपल को कड़ी फटकार लगाई और छात्रों द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।