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Satta Ka Sangram: महागठबंधन ने कहा- सरकार की विफलताओं से जनता त्रस्त, भाजपा नेता बोले- अब कुछ करना ही नहीं है

Thu, 16 Oct 2025 04:44 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Bihar Assembly Election 2025: बिहार में 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर चुनावी माहौल गर्म है। इसी सिलसिले में अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ गुरुवार को मुजफ्फरपुर पहुंचा। सुबह और दोपहर आम जनता तथा युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दे जाने गए। अब राजनेताओं से चर्चा पक्ष-विपक्ष अपनी बात रख रहे हैं।
 
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सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में सियासी पारा हर दिन चढ़ता जा रहा है। इस बीच, गुरुवार को अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ मुजफ्फरपुर पहुंचा। यहां के मतदाताओं के मन में क्या है? वो चुनाव को लेकर क्या सोच रहे हैं? इन सब बातों को अमर उजाला ने जाना।  

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परिवारवाद बनाम विकास
यहां मतदाताओं के बीच एक स्पष्ट राय देखने को मिली। वे इस पर गौर कर रहे हैं कि कौन-सा दल परिवारवाद को बढ़ावा दे रहा है और कौन विकास का वादा कर रहा है। यहां के रहने वाले भोला कुमार ने चाय पर चर्चा के दौरान कहा कि विपक्षी गठबंधन पर परिवारवाद के आरोप लगते हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन विकास को मुद्दा बना रहा है। 
 
'पहले वोट डालना भी सुरक्षित नहीं था'
स्थानीय निवासी ओम कुमार शाह बताते हैं कि पहले बिहार में दंगे ज्यादा होते थे। लोग वोट डालना भी सुरक्षित नहीं समझते थे। हालांकि, अमर उजाला की टीम ने दोपहर में जब युवाओं से बात की, तो उन्होंने दूसरे दलों को मौका देने की बात कही। निक्कू अब्बास ने कहा कि पढ़ाई के मामले में सिर्फ मुजफ्फरपुर, पटना और दरभंगा ही थोड़ा विकसित हैं, बाकी जगहों की स्थिति अच्छी नहीं है। अगर सत्ता बदलती है तो उम्मीद है कि कुछ बदलाव होगा। बाकी युवाओं का कहना था कि मुजफ्फरपुर का विकास होना चाहिए, भले ही सरकार किसी की भी बने। 
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'यूनिवर्सिटी और एयरपोर्ट होना चाहिए'
सैयद हुसैन कहते हैं कि शहर में यूनिवर्सिटी और एयरपोर्ट होना चाहिए। अभी यहां के लोग छोटी-छोटी नौकरियां करने को मजबूर हैं। प्रिंस कुमार बताते हैं कि सरकार की हाल की योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि ये चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। अभी तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था। 
 
‘जनता चाहती है बदलाव’
दाऊद कहते हैं कि जनता बदलाव चाहती है। बिहार में पलायन सबसे बड़ी समस्या है। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। सईद अली अंसारी ने कहा कि वे बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी नौकरी मिलना मुश्किल है। यहां की पढ़ाई का तरीका भी पुराना है, जिसकी वजह से छात्रों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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नेताओं के अपने-अपने दावे
अमर उजाला की टीम ने शाम को शहर के राजनेताओं से चर्चा की। राजद नेता रियाज अहमद ने कहा कि 20 साल तक जो एनडीए की सरकार रही है, उसकी विफलताओं से जनता त्रस्त है। इस बार सत्ता परिवर्तन होगा। 20 वर्षों से लोग इंतजार में हैं। पानी, जल भराव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं वैसी ही हैं। कभी इस शहर को ‘मिनी मुंबई’ बनाने का सपना संजोया गया था, लेकिन एनडीए सरकार इसमें पूरी तरह असफल हुई है। 
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जदयू नेता इरशाद हुसैन ने राजद के सवालों के जवाब में कहा कि 20 वर्षों में बिहार में जो विकास हुआ है, वह आम जनता भी देख रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में चले जाइए, 20 साल पहले जो बिहार था और जो आज है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर है। आज स्कूल हैं। टीचर हैं। बच्चे पढ़ रहे हैं। पहले मोमबत्ती की रोशनी में ऑपरेशन होता था। आज उपचार की मशीनें हैं।

भाजपा नेता साकेत ठाकुर ने कहा कि नीतीश कुमार और मोदी जी ने इतना काम कर दिया है कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। नीतीश जी ने बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज और महिलाओं की रोजी-रोटी तक की सारी व्यवस्थाएं की हैं। भाजपा नेता साकेत जोश में यहां तक बोल गए कि एनडीए सरकार में इतनी व्यवस्था हो गई है कि अब कुछ करना ही नहीं है।  

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