नम आंखों से मां सरस्वती को विदाई
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मुजफ्फरपुर जिले में माता सरस्वती की विदाई भावनाओं से भरी रही। कंधे पर डोली लेकर नम आंखों से मां को विदा किया गया। जय-जयकार और ‘जल्द वापस आना’ के नारों से पूरा शहर गूंज उठा। अलग-अलग इलाकों से निकली विदाई यात्राएं शहर का आकर्षण बन गईं।
इमली चट्टी गुजराती मुहल्ले की अनोखी पहल
शहर के इमली चट्टी गुजराती मुहल्ले में युवाओं ने माता सरस्वती को अनोखे अंदाज में विदाई दी। डोली के माध्यम से प्रतिमा को कंधों पर उठाकर पूरे शहर में भ्रमण कराया गया, जिसने राह चलते लोगों का ध्यान खींचा और श्रद्धा का वातावरण रचा।
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संयुक्त पूजन के बाद विसर्जन की तैयारी
इमली चट्टी गुजराती मुहल्ले के युवाओं ने संयुक्त रूप से पूजन के बाद माता को अंतिम विदाई दी। इसके बाद विसर्जन के लिए प्रतिमा को बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बनाए गए कृत्रिम तालाब में ले जाया गया। युवाओं ने बताया कि इस बार बिना गाजे-बाजे और रथ के विदाई देने का निर्णय लिया गया। मां सरस्वती को कंधे पर डोली में विदा कर परंपरा और सादगी के साथ भावनात्मक संदेश दिया गया, जिसे लेकर युवाओं में खास उत्साह रहा।
स्थानीय युवा संतोष कुमार ने कहा कि इस प्रकार की विदाई संस्कृति और रिवाजों के संरक्षण का प्रयास है। युवाओं ने मां की विदाई अपनी परंपरा के अनुसार देकर समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया।