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मुजफ्फरपुर जेल में छलके आंसू: भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं बहनें, जल्द रिहाई और सलामती की मांगी दुआ

Fri, 28 Aug 2026 12:00 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क,अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

रक्षाबंधन के अवसर पर मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में भावुक माहौल देखने को मिला। सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों की बहनें जेल पहुंचीं और भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर माथे पर तिलक लगाया व मिठाई खिलाई।
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बहनों ने कैदियों की कलाई पर बांधी राखी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सावन माह के अंतिम दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार है। इस पवित्र अवसर पर मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में भी भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले। जेल में बंद सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों से मिलने के लिए उनकी बहनें पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और उनकी लंबी उम्र, सलामती और जल्द रिहाई की दुआ मांगी। कई बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधते समय भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

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सुबह से जेल के मुख्य गेट पर लगी बहनों की कतार
रक्षाबंधन को लेकर जेल प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही अलग-अलग इलाकों से आई बहनें जेल के मुख्य गेट के बाहर कतार में खड़ी होकर अपने नंबर का इंतजार करती नजर आईं। इसके बाद बारी-बारी से उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई और उन्होंने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद कई बहनें भावुक हो गईं। मुख्य गेट के पास पहुंची बहनों ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कामना है कि उनका भाई जल्द घर लौटे, खुश रहे और सुरक्षित रहे। इसी उम्मीद के साथ वे रक्षाबंधन के दिन अपने भाइयों को राखी बांधने जेल पहुंची हैं।

तिलक लगाया, मिठाई खिलाकर भाइयों की सलामती की मांगी दुआ
जेल में बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद मिठाई खिलाकर उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सलामती की दुआ मांगी। लंबे समय बाद भाई-बहन के इस मिलन के दौरान कई भावुक पल देखने को मिले। सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों के लिए रक्षाबंधन का यह दिन खास रहा। जेल की चारदीवारी के बीच बहनों की मौजूदगी ने माहौल को भावुक बना दिया।
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ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से लिए गए आवेदन
जेल अधीक्षक यूसुफ रिजवान ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर इस बार भी जेल प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी बहन को अपने भाई को राखी बांधने में परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि कैदियों को राखी बांधने के लिए बहनों से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन लिए गए थे। बहनें अपनी पहचान पत्र के आधार पर जेल में बंद अपने भाई से मुलाकात कर उन्हें राखी बांध सकती हैं।

सुबह 8 बजे से शुरू हुआ सिलसिला, अंतिम व्यक्ति तक राखी बांधने की व्यवस्था
जेल अधीक्षक ने बताया कि राखी बांधने की प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू हुई और लगातार जारी रही। अंतिम व्यक्ति तक राखी बांधने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी बहन को बिना राखी बांधे वापस न लौटना पड़े। उन्होंने बताया कि पिछले साल करीब 300 कैदियों को उनकी बहनों ने राखी बांधी थी। इस बार यह संख्या थोड़ी ज्यादा रहने की संभावना है।

जेल गेट से हर चेक प्वाइंट तक सख्त सुरक्षा
रक्षाबंधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जेल पहुंचने को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए। जेल गेट से लेकर प्रत्येक चेक प्वाइंट तक सख्त जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। जेल अधीक्षक ने बताया कि बहनों द्वारा अपने भाइयों के लिए लाई गई मिठाई की भी प्रारंभिक जांच की गई। जांच के बाद ही मिठाई को संबंधित कैदियों तक पहुंचाया जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बहनों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया।

रक्षाबंधन के मौके पर शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में भाई-बहन के रिश्ते की भावुक तस्वीर देखने को मिली। किसी बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सलामती मांगी तो किसी ने जल्द घर लौटने की दुआ की। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच दिनभर राखी बांधने का सिलसिला जारी रहा।

 

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