मुजफ्फरपुर जिले में पिछले दो दिनों से हुई बारिश ने लीची उत्पादक किसानों के चेहरे पर राहत की मुस्कान ला दी है। लगातार तेज गर्मी और गर्म हवाओं से झुलस रही फसल को बारिश ने संजीवनी दी है। अब बागानों में नमी बढ़ने से लीची में लालिमा आने लगी है और किसान अगले दो सप्ताह में तुड़ाई शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं।
शाही और चाइना लीची की होगी आवक
पहले चरण में शाही लीची बाजार में आएगी, इसके बाद चाइना लीची की तुड़ाई शुरू होगी। इसे लेकर किसान बागानों में गतिविधियां तेज कर चुके हैं। मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी, मीनापुर, बोचहा, कांटी और कुढ़नी प्रखंडों में सबसे अधिक लीची के बागान हैं। पूरे जिले में लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती होती है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा करीब 35 हजार हेक्टेयर है।
मौसम और कीट बने चुनौती
किसानों के अनुसार पिछले वर्षों में मौसम में उतार-चढ़ाव और लंबे समय तक ठंड बने रहने के कारण शाही लीची के मंजर में कमी आई थी। मार्च में बारिश और तापमान में अचानक बदलाव ने भी उत्पादन को प्रभावित किया। इसके अलावा स्टिंग बग जैसे कीट भी फसल के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
वैज्ञानिकों की सलाह
लीची अनुसंधान संस्थान, लीची अनुसंधान संस्थान मुजफ्फरपुर के निदेशक विकास दास ने बताया कि मौजूदा मौसम कीटों के प्रकोप के लिए अनुकूल है, इसलिए किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए।
किसानों को तीन प्रमुख सुझाव दिए
- छिड़काव सुबह या शाम के समय करें
- अनुशंसित मात्रा में ही दवाओं का उपयोग करें
- बागों में हल्की सिंचाई कर नमी बनाए रखें
विशेषज्ञों ने फल की गुणवत्ता सुधारने और कीट नियंत्रण के लिए घुलनशील बोरॉन और कीटनाशी दवाओं के उपयोग की भी सलाह दी है। साथ ही तुड़ाई से 10–12 दिन पहले अंतिम छिड़काव करने की बात कही गई है।
बेहतर उत्पादन की उम्मीद
वैज्ञानिकों का कहना है कि सही प्रबंधन और मौसम अनुकूल रहने पर इस बार लीची की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।