मुजफ्फरपुर जिले में कोलकाता पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने विदेशी नागरिकों को फर्जी टेक सपोर्ट और टेलीकॉम सेवाओं का झांसा देकर ठगी करने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना अजय साव उर्फ जानी (38) को सदर थाना क्षेत्र के भगवानपुर के पास स्थित एक किराए के मकान से गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, लैपटॉप और यूके के नागरिकों की जानकारी वाली एक डायरी बरामद की गई है। शुक्रवार शाम आरोपी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मांगी। कोर्ट ने 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की। इसके बाद कोलकाता पुलिस आरोपी अजय साव को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रवाना हो गई।
कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी से खुला नेटवर्क
कोलकाता पुलिस के अनुसार, 18 अगस्त 2026 को पुलिस निरीक्षक मौसुमी बिस्वास के नेतृत्व में करया थाना क्षेत्र के ओल्ड बालगंज फर्स्ट लेन स्थित एक इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जोरासनको थाना क्षेत्र के सैयद सल्ले लेन निवासी फिरदौस इकबाल (36), बेनियापुकुर थाना क्षेत्र के सर्कस एवेन्यू निवासी एसके सज्जाद (36) और बेनियापुकुर थाना क्षेत्र के पिकनिक गार्डेन रोड निवासी रूपम टिमोथी बिस्वास (23) के रूप में हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पूरा कॉल सेंटर किराए के परिसर से संचालित किया जा रहा था।
पूछताछ में सामने आया अजय साव का नाम
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की तो कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कड़ी मुजफ्फरपुर तक पहुंच गई। पूछताछ में जानकारी मिली कि मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर निवासी अजय साव यूके के नागरिकों का डेटा जुटाता था। इसी डेटा के आधार पर कोलकाता के किराए के परिसर से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था।
पुलिस ने इसके बाद अजय साव की तलाश शुरू की और उसे सदर थाना क्षेत्र के भगवानपुर के पास एक किराए के मकान से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से यूके के लोगों की डिटेल्स वाली डायरी मिलने को पुलिस जांच में अहम कड़ी मान रही है।
फर्जी कंपनी का अधिकारी बनकर लेते थे कंप्यूटर का एक्सेस
कोलकाता साइबर पुलिस के अनुसार, आरोपी रिमोट एक्सेस एप एनीडेस्क, एमी एडमिन, कॉलिंग एप आईबीम और वीओआईपी एप्लीकेशन के साथ फर्जी और आपराधिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। आरोप है कि वे खुद को यूके की प्रसिद्ध कंपनी ह्यूमन माइंड का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे।
इसके बाद आरोपी विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर और पेमेंट सिस्टम का अनधिकृत एक्सेस हासिल कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक, कंप्यूटर और पेमेंट सिस्टम तक पहुंच मिलने के बाद आरोपित क्रेडिट कार्ड और पेमेंट गेटवे के जरिए रकम अवैध तरीके से अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।
वाईफाई और तकनीकी सहायता देने वाला आरोपी भी गिरफ्तार
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद 19 अगस्त को कोलकाता जिले के टालटोला से चौथे आरोपी मो. शब्बीर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शब्बीर फर्जी कॉल सेंटर को वाईफाई राउटर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता था।
अब मुख्य सरगना अजय साव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क, विदेशी नागरिकों के डेटा के स्रोत, फर्जी खातों और ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।