मुजफ्फरपुर पुलिस और पटना पुलिस की विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर रंगदारी मांगने वाले फर्जी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में कांटी थाना क्षेत्र निवासी कन्हाई सहनी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने महज चार दिनों में जिले के कई प्रभावशाली लोगों से कुल 3 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिससे धमकी भरे कॉल और व्हाट्सएप मैसेज भेजे जा रहे थे।
चार दिनों में चार बड़े लोगों से मांगी 3 करोड़ की रंगदारी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने साहेबगंज, ब्रह्मपुरा और सदर थाना क्षेत्र में रंगदारी की वारदातों को अंजाम दिया। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के भाजपा नेता रंजीत सहनी से 50 लाख रुपये, जिला पार्षद राजेश सहनी से 1 करोड़ रुपये, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के पुत्र कृष्ण मुरली से 50 लाख रुपये तथा परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।
एसएसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम
एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र के निर्देश पर सरैया एसडीपीओ और टाउन एसडीपीओ-2 के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कन्हाई सहनी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसके पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद हुआ, जिससे विभिन्न लोगों को धमकी भरे संदेश भेजे गए थे।
होटल मालिक के नंबर से बनाया फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित वृंदावन के एक होटल में काम करता था। वहीं उसने होटल मालिक के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर 4 जुलाई 2026 को 'Lawrence Bishnoi Group' नाम से फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाई। इसके बाद मुजफ्फरपुर लौटकर उसी नंबर से प्रतिष्ठित लोगों को कॉल और मैसेज कर रंगदारी मांगनी शुरू कर दी। आरोपी ने इस योजना की जानकारी केवल अपने कुछ साथियों को दी थी।
व्हाट्सएप मैसेज से देता था धमकी
पुलिस के अनुसार, आरोपी व्हाट्सएप मैसेज और कॉल के जरिए खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताकर लोगों को डराता था। इस संबंध में मुजफ्फरपुर और पटना में कुल चार थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
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डिजिटल ट्रेल की जांच जारी
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में व्हाट्सएप अकाउंट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य डिजिटल ट्रेल की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस फर्जी रंगदारी गिरोह से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी चर्चाओं पर लगा विराम
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाला यह फर्जी गिरोह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल कर लोगों में दहशत फैलाकर रंगदारी वसूलने की कोशिश कर रहा था। इस खुलासे के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें इन धमकियों को सीधे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जोड़कर देखा जा रहा था।