: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में सहायक अध्यापक नियुक्ति में फर्जीवाड़ा
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मुजफ्फरपुर के बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय में सहायक अध्यापक की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में यह पता चला कि कुछ उम्मीदवारों ने नौकरी पाने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर आवेदन किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत इस फर्जीवाड़े को पकड़ते हुए संबंधित नियुक्ति को रोक दिया है।
'अनुभव प्रमाण में गड़बड़ी'
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने अपनी जांच में पाया कि हाल ही में नियुक्त कई सहायक अध्यापकों के अनुभव प्रमाण पत्र यूजीसी के मापदंडों के अनुरूप नहीं थे। बीते एक वर्ष में विश्वविद्यालय ने लगभग 350 से 400 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की थी। नियुक्ति के समय यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। जांच में यह सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी तरीके से अनुभव प्रमाण पत्र अटैच किए थे, जिससे उन्हें नौकरी दिलाने की कोशिश की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने ऐसे सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रोक दिया।
राज्य सरकार और आयोग को सूचित
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जानकारी राज्य सरकार और संबंधित आयोग को भी भेजी है। आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय को खुद से मामले की जांच करने के लिए पत्राचार किया है। कुलपति डॉ. दिनेश चंद्र राय ने बताया कि इस मामले में आयोग ने चयन किया था और सूची विश्वविद्यालय को दी थी। विश्वविद्यालय का काम केवल जांच करना था। उन्होंने कहा कि जांच के लिए कर्मियों की कमी के बावजूद विश्वविद्यालय ने मामला खुद जांचा है, लेकिन आगे की कार्रवाई के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
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कुलपति का बयान
डॉ. दिनेश चंद्र राय ने कहा, "इस मामले में आयोग ने चयन किया और हमें सूची दी। हमारा काम केवल जांच करना था। हमारे पास जांच करने के लिए पर्याप्त कर्मी नहीं थे, लेकिन हमने स्वयं मामले की जांच की। अब आगे की कार्रवाई राज्य सरकार और आयोग से दिशा निर्देश मिलने के बाद की जाएगी।"