उत्तर नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद बिहार में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल से फ्लैश फ्लड की लहर तेजी से बिहार की ओर बढ़ने की आशंका है। नेपाल की सीमा बिहार से लगती है। ऐसे में संभावित खतरे को देखते हुए पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर समेत गंडक नदी से जुड़े जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
संभावित भीषण बाढ़ के खतरे को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने की अपील की गई है। मुजफ्फरपुर के रेवा घाट स्थित गंडक नदी के पास डीएम कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इसके अलावा जिला प्रशासन ने जिला आपदा प्रबंधन का कंट्रोल रूम 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल ने भी कहा है कि सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
बढ़ा खतरा, लगातार माइकिंग कर लोगों को किया जा रहा जागरूक
अचानक जलस्तर बढ़ने और तेज कटाव से बड़े नुकसान की आशंका है। इससे छोटे पुल-पुलियों और फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। स्थिति को देखते हुए डीएम कुमार गौरव अलर्ट मोड पर हैं और सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान में नदियां खतरे के निशान से नीचे
वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिले से होकर गुजरने वाली गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालांकि, गंडक और बागमती के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका के चलते एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। दियारा क्षेत्रों में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए एहतियात के तौर पर माइकिंग कराई जा रही है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
गंडक से जुड़े सभी जिलों में अलर्ट, 24 घंटे निगरानी के निर्देश
गंडक नदी में संभावित बढ़े हुए जलप्रवाह को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के बेतिया और बगहा, पूर्वी चंपारण के मोतिहारी, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर और सीमावर्ती अन्य संवेदनशील जिलों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।
मुजफ्फरपुर जिले के पारू, सरैया और साहेबगंज प्रखंड प्रमुख रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में गंडक नदी में बाढ़ आने पर पहले भी भारी नुकसान होता रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।