मुजफ्फरपुर जिले के बैरिया गोलंबर पर देश के महान क्रांतिकारी अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल की 92वीं शहादत दिवस मनाई गई। इस मौके पर जिला प्रशासन, नगर निगम, कई जनप्रतिनिधियों और अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल समिति के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम से पूर्व बैरिया गोलंबर की साफ-सफाई की गई और गोलंबर स्थित पार्क को विशेष रूप से सजाया गया, जहां अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके पूर्व अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल को गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी भी दी गई और 'अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल अमर रहें' के नारे लगाए गए।
शहीद बैकुंठ शुक्ल के बलिदान को किया गया याद
आपको बता दें कि बिहार के वैशाली जिले के जलालपुर गांव में वर्ष 1907 में जन्म लेने वाले महान क्रांतिकारी शहीद बैकुंठ शुक्ल बहुत कम उम्र में देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। इसके बाद महज 27 वर्ष की आयु में 14 मई 1934 को गया जेल में उन्हें फांसी दे दी गई थी। अंग्रेज उनके आंदोलन और विरोध से डरे हुए थे। उनके आक्रामक तेवर और क्रांतिकारी गतिविधियों से भयभीत अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें जेल में ही फांसी पर चढ़ा दिया था।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ कार्यक्रम की हुई शुरुआत
गुरुवार को कार्यक्रम की शुरुआत जिला प्रशासन द्वारा शहीद बैकुंठ शुक्ल को गार्ड ऑफ ऑनर देने के साथ की गई। इस दौरान मौजूद लोगों ने शहीद के योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया।
बैरिया बस स्टैंड के नामकरण पर जताया आभार
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुजफ्फरपुर जिले के बैरिया बस स्टैंड का नामकरण शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर किए जाने और बैरिया गोलंबर पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया। लोगों ने मांग की कि इस पार्क और प्रतिमा की देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम को दी जाए।
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समिति के मीडिया प्रभारी ने कही प्रेरणादायक बात
समिति के मीडिया प्रभारी आचार्य चंद्रकिशोर पाराशर ने कहा कि आज का दिन देश के बलिदानी बैकुंठ शुक्ल के बलिदान से प्रेरणा लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि एक छोटे से गांव से निकलकर बैकुंठ शुक्ल ने ब्रिटिश सरकार को बड़ी चुनौती दी थी। उनके कार्यों को पूरा देश जानता है। प्रतिवर्ष इस आयोजन का आयोजन किया जाता है और इसी का परिणाम है कि मुजफ्फरपुर के बैरिया बस स्टैंड का नाम अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर रखा गया। साथ ही इस पार्क में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई, ताकि इस व्यस्त सड़क से गुजरने वाले लोग महान क्रांतिकारी बैकुंठ शुक्ल को हमेशा याद रखें और देश के लिए उनके समर्पण को नमन करें।