सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ चार अरेस्ट
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केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा आयोजित मद्य निषेध विभाग के सिपाही, कक्षपाल और चलंत सिपाही पदों की लिखित परीक्षा के दौरान मुजफ्फरपुर में नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में दो परीक्षार्थियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
सॉल्वर गैंग से जुड़े हुए हैं आरोपी
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया कि परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपित एक सॉल्वर गैंग से जुड़े हुए हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा में मदद पहुंचा रहे थे।
परीक्षा केंद्र पर पकड़ा गया पहला अभ्यर्थी
जानकारी के अनुसार, मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित चैपमैन बालिका उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तलाशी के दौरान भोजपुर जिले के छोटकी सहजौली निवासी पंकज कुमार को पकड़ा गया। जांच में उसके पास से ब्लूटूथ डिवाइस बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान पंकज ने अपने अन्य साथियों की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सिकंदरपुर थाना क्षेत्र स्थित राधाकृष्ण केडिया बालिका उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से भोजपुर जिले के सुंदरपुर कोठिया निवासी प्रकाश कुमार को गिरफ्तार किया। उसके पास से भी ब्लूटूथ डिवाइस बरामद किया गया।
पटना तक पहुंची जांच
दोनों आरोपितों से पूछताछ के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर पटना समेत कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान संजय कुमार सिंह उर्फ रंजन कुमार और पंकज कुमार नामक दो अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में इनका संबंध पटना में सक्रिय सॉल्वर गैंग से जुड़ा होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और संचालकों की पहचान करने में जुटी है।
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डिवाइस से आई आवाज, तब खुला राज
सिटी एसपी ने बताया कि परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद एक अभ्यर्थी के पास मौजूद ब्लूटूथ डिवाइस से आवाज सुनाई दी, जिससे सुरक्षाकर्मियों को संदेह हुआ। तलाशी लेने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किया गया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था।