भारत जब 2047 में एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा, तो उसमें आयुर्वेद का महत्वपूर्ण योगदान होगा। यह न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग भी है। उक्त बातें बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने मुजफ्फरपुर में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में कहीं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए देशभर की विभिन्न आयुर्वेद संस्थाएं लगातार कार्य कर रही हैं। इस क्षेत्र में हो रहे विकास का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
आयुर्वेद को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में बढ़ रहे कदम
कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद मंत्री ने कहा कि भारत का विकास तभी संभव होगा जब हम अपनी विरासत और परंपराओं का सम्मान करेंगे और उनका सदुपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन काल से आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसके माध्यम से ही हमने विश्वपटल पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।
मंत्री ने इस अवसर पर आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले युवाओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आयुर्वेद भारत की चिकित्सा व्यवस्था में एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित होगा।
आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ आयुर्वेद की भूमिका
एलोपैथिक दवाइयों और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से मिल रही प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में एलोपैथी का योगदान अवश्य है, लेकिन आयुर्वेद हमारी सनातन संस्कृति और चिकित्सा परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। दुनिया के कई देशों में आयुर्वेद को लेकर नई खोजें और शोध हो रहे हैं, जिससे इसकी महत्ता और प्रभावशीलता को और अधिक बल मिल रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों ही आयुर्वेद को मजबूत करने के लिए गंभीर हैं, ताकि यह चिकित्सा पद्धति पुनः अपने स्वर्णिम दौर में लौट सके और भारत को 2047 तक एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में योगदान दे सके।
आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को मिल रहा बढ़ावा
मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि सरकार आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है, जो व्यक्ति को स्वस्थ और दीर्घायु बनाए रखने में सहायक होती है। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आयुर्वेद को अपनाएं, इसके प्रचार-प्रसार में योगदान दें और इसे विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लिए कार्य करें।
2047 का भारत और आयुर्वेद की भूमिका
मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि 2047 तक भारत जब एक विकसित राष्ट्र के रूप में खड़ा होगा, तो इसमें आयुर्वेद की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। यह केवल चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में भी पहचाना जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध और उपचार पद्धतियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार कर रही है, जिससे आयुर्वेद का विस्तार तेजी से हो और यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ कदमताल करते हुए वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना सके।