पुलिस प्रशासन ने दोनों समुदायों के साथ की बैठक
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मोतिहारी में छठ घाट पर सिरसोप्ता तोड़ने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया। यह घटना रघुनाथपुर पंचायत के नन्हकार गांव के तालाब पर हुई, जहां छठ पूजा के लिए सिरसोप्ता का निर्माण किया जा रहा था। इस दौरान आमोदेई गांव के कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर सिरसोप्ता को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही रक्सौल एसडीपीओ धीरेन्द्र कुमार और सुगौली इंस्पेक्टर अशोक कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।
क्या है समस्या की जड़?
तालाब पर छठ पूजा को लेकर पहले से ही दोनों गांवों के बीच विवाद रहा है। आमोदेई के ग्रामीण इस तालाब को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं, जबकि नन्हकार के ग्रामीण इसे छठ पूजा के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। पहले भी इस मुद्दे पर पंचायत हुई थी और तालाब के एक हिस्से का सीमांकन कर नन्हकार के ग्रामीणों को छठ पूजा के लिए दिया गया था।
विवाद का कारण
इस वर्ष छठ पूजा के लिए व्रतियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नन्हकार के लोगों ने दो नए सिरसोप्ता का निर्माण शुरू किया। आमोदेई के लोगों का आरोप है कि नन्हकार के ग्रामीणों ने पंचायत में तय सीमा से बाहर सिरसोप्ता बना रहे थे, जबकि नन्हकार के ग्रामीण इसे तय सीमा के भीतर बता रहे हैं। आमोदेई के लोगों ने सिरसोप्ता तोड़ने का आरोप खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने केवल निर्माण रोकने का प्रयास किया।
पुलिस प्रशासन हरकत में आया
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से हालात संभाल लिए गए। सोमवार को एसडीएम शिवाक्षी दीक्षित और एसडीपीओ धीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में दोनों समुदायों के बीच रामगढ़वा थाना परिसर में बैठक आयोजित की गई। इसमें सभी को निर्देश दिया गया कि छठ पर्व तक विवादित भूमि पर कोई नया निर्माण नहीं किया जाएगा। छठ के बाद इस जमीन के मालिकाना हक पर सुनवाई होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छठ घाट पर असामाजिक तत्वों की उपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शांति बनाए रखने का लिया संकल्प
तनावपूर्ण माहौल को शांत करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय मुखिया और ग्रामीणों के साथ मिलकर शांति बैठक आयोजित की। इस बैठक में दोनों समुदायों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। सभी ने शांति बनाए रखने का संकल्प लिया। प्रशासन की सक्रियता और समय पर हस्तक्षेप के कारण विवाद बड़ा रूप नहीं ले पाया और छठ पूजा का आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न होने की उम्मीद है।