थाना परिसर में ठग तथा फर्जी आई कार्ड
- फोटो : अमर उजाला
मोतिहारी में थाना परिसर के भीतर बेरोजगार युवकों से ठगी के मामले को अमर उजाला द्वारा उजागर किए जाने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया है। मामला सामने आते ही पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मोतिहारी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है और जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
थाना परिसर में ठगी का खुलासा
अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अरेराज थाना के कैंपस में बेरोजगार युवकों से पुलिस मित्र बनाने के नाम पर ठगी की गई। अरेराज, गोविंदगंज, घोड़ासहन, पलनवा और कोटवा थाना क्षेत्रों के करीब 42 युवकों से लाखों रुपये की ठगी का आरोप सामने आया। एक एनजीओ संस्था द्वारा पुलिस मित्र के नाम पर बहाली का भरोसा देते हुए 16 हजार रुपये मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया था।
पुलिस की मौजूदगी से बढ़ा भरोसा
खास बात यह रही कि थाना परिसर में पुलिस की मौजूदगी में युवकों को आई कार्ड पहनाए गए। इसी कारण बेरोजगार युवकों को यह विश्वास हो गया कि थाना कैंपस में ठगी संभव नहीं है। इसी भरोसे के चलते युवकों ने पैसे दिए, लेकिन बाद में उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पढ़ें- थाने से मिला हवलदार का खून से सना शव: सुबह की थी पत्नी से बात, दो घंटे में क्या बदला कि गले के पार हो गई गोली?
पीड़ितों में आई शिकायत करने की हिम्मत
खबर प्रकाशित होने के बाद कई पीड़ित युवकों में हिम्मत आई और उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया। ठगी का शिकार बने एक युवक ने कोटवा थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद जिले का पूरा पुलिस महकमा सक्रिय हो गया।
एसपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन
मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया है। एसपी ने बताया कि ठगी में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई है, जिनका नेटवर्क बिहार के कई जिलों में फैला हुआ है।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ठगी करने वाले समस्तीपुर जिले के रहने वाले हैं। इन लोगों द्वारा बिहार के कई जिलों में बेरोजगार युवकों को इसी तरह ठगे जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया है।