मोतिहारी के रक्सौल नगर परिषद की सभापति धुरुपति देवी पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध बहाली के गंभीर आरोपों के बाद उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभापति से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अगर वे संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहीं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
अवैध बहाली और करोड़ों की खरीद का आरोप
सभापति धुरुपति देवी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नगर परिषद में लिपिक और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की अवैध बहाली की। इतना ही नहीं, बोर्ड की बैठक में स्वीकृति लिए बिना ही उन्होंने 6.63 करोड़ रुपये के उपकरणों की खरीदारी भी कर ली। इस मनमानी से नगर परिषद में असंतोष फैल गया और पार्षदों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई।
एडीएम के नेतृत्व में बनी जांच टीम
इस घोटाले के उजागर होने के बाद, रक्सौल नगर परिषद के उपसभापति ने दर्जनों पार्षदों के साथ मिलकर मोतिहारी के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल से इसकी जांच की मांग की। पार्षदों का आरोप था कि सभापति ने अधिकारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर लूट-खसोट की और अवैध तरीके से पैसे की उगाही की।
जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की। यह टीम नगर परिषद पहुंची और विभिन्न फाइलों की गहन जांच की, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं।
जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने अपनी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को भेज दी। जांच में मिले सबूतों के आधार पर विभाग के अपर सचिव राजेश्वर राज ने सभापति धुरुपति देवी को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। अगर वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाती हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें पद से हटाने की सिफारिश भी शामिल हो सकती है।
पार्षदों में आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर नगर परिषद के पार्षदों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि नगर परिषद में वर्षों से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है और अब इसे खत्म करना जरूरी है। कई पार्षदों ने मांग की है कि सभापति को पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
क्या कहता है कानून?
नगर निकाय के नियमों के अनुसार, अगर किसी सभापति पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अनियमित रूप से किए गए सभी फैसलों को रद्द किया जा सकता है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।