मोतिहारी में बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने की जिम्मेदारी निभाने वाले एक सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर अब एक बालिग आरोपी को नाबालिग साबित कर कानून की गिरफ्त से बचाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगा है। किशोर न्याय परिषद में सुनवाई के दौरान जन्मतिथि में कथित हेरफेर का मामला सामने आने के बाद किशोर न्याय परिषद के बेंच क्लर्क नरेंद्र कुमार सिंह के आवेदन पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले ने शिक्षा विभाग और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोपी की उम्र का सत्यापन किया जा रहा था
जानकारी के अनुसार, किशोर न्याय परिषद में एक आपराधिक मामले के आरोपी अखिलेश कुमार की उम्र का सत्यापन किया जा रहा था। आरोपी की ओर से राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बैरिया का स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) प्रस्तुत किया गया। इसके समर्थन में आरोपी के पिता ने शपथ पत्र भी दाखिल किया है। वहीं, विद्यालय के वर्तमान प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार न्यायालय में उपस्थित हुए और बयान दिया कि अखिलेश कुमार का नामांकन 14 सितंबर 2011 को कक्षा तीन में हुआ था तथा विद्यालय के नामांकन पंजी में उसकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2003 दर्ज है।
लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई
सुनवाई के दौरान जब न्यायालय ने प्रस्तुत स्थानांतरण प्रमाण पत्र का मिलान विद्यालय के मूल अभिलेखों से कराया, तो प्रथम दृष्टया बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। आरोप है कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र में जन्म वर्ष 2003 को बदलकर 2008 कर दिया गया, ताकि आरोपी को नाबालिग घोषित कर किशोर न्याय अधिनियम का लाभ दिलाया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए किशोर न्याय परिषद के बेंच क्लर्क नरेंद्र कुमार सिंह ने मुफस्सिल थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसी धाराओं में की गई कार्रवाई
जांच का केंद्र इस बात पर है कि जन्मतिथि में कथित हेरफेर किसके निर्देश पर और किन लोगों की मिलीभगत से की गई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और संबंधित अभिलेखों की गहन जांच कर रही है।