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Bihar News: हमेशा याद रहे 'ऑपरेशन सिंदूर'...इसलिए अपने बच्चों को दिया यही नाम; देशभक्ति में लिया फैसला

Thu, 08 May 2025 07:32 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर

सार

Bihar: केजरीवाल मातृ शिशु अस्पताल के नवजात विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ ने कहा कि 'सिंदूर’ नाम अब सिर्फ एक नाम नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे देश के गौरव और सेना की वीरता का प्रतीक बन गया है। पहले लोग अपने बच्चों के नाम फिल्मी सितारों के नाम पर रखते थे, लेकिन अब देशभक्ति से प्रेरित नामों को महत्व दिया जा रहा है।
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बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरपुर में भारतीय सेना के हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से प्रेरित होकर कई दंपतियों ने अपने नवजात बच्चों का नाम ‘सिंदूर’ रखा है। यह नाम अब न सिर्फ एक बच्चे की पहचान बन रहा है, बल्कि देशभक्ति के प्रतीक के रूप में भी सामने आ रहा है। इस पहल को लेकर शहर के अस्पतालों में यह चर्चा का विषय बन गया है। इसी कड़ी में जाफरपुर गांव निवासी पवन सोनी, जिनके बेटे का जन्म केजरीवाल शिशु अस्पताल में हाल ही में हुआ है, ने अपने नवजात का नाम ‘सिंदूर’ रखा। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे बेटे के नाम से ही उसे देशभक्ति की प्रेरणा मिले। वह बड़ा होकर भारतीय सेना में शामिल हो और देश की सेवा करे। यही हमारा सपना है। ‘सिंदूर’ सिर्फ एक नाम नहीं, यह एक जज़्बा है देश के लिए कुछ कर गुजरने का।

वहीं, बोचहा थाना क्षेत्र के कन्हारा गांव के हिमांशु राज ने अपनी बेटी का नाम भी ‘सिंदूर’ रखा है। उनका कहना है कि वह हर साल अपनी बेटी के जन्मदिन पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को याद करते हुए उसका जश्न मनाएंगे। सूत्रों के अनुसार, बीते 24 घंटे में ही मुजफ्फरपुर के विभिन्न अस्पतालों में एक दर्जन से अधिक बच्चों के नाम ‘सिंदूर’ रखे गए हैं। जन्म प्रमाण पत्र कार्यालयों में भी इस नाम की प्रविष्टि तेजी से बढ़ रही है।

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पढ़ें: बिहार में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज, बेटी का नाम रखा "सिंदूरी"; अब खूब हो रही चर्चा

केजरीवाल मातृ शिशु अस्पताल के नवजात विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ ने कहा कि 'सिंदूर’ नाम अब सिर्फ एक नाम नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे देश के गौरव और सेना की वीरता का प्रतीक बन गया है। पहले लोग अपने बच्चों के नाम फिल्मी सितारों के नाम पर रखते थे, लेकिन अब देशभक्ति से प्रेरित नामों को महत्व दिया जा रहा है, जो एक सकारात्मक बदलाव है। इस अनोखी पहल ने यह साबित कर दिया है कि मुजफ्फरपुर के लोग सेना के साहसिक कारनामों से गहराई से जुड़े हैं, और वे अपने बच्चों के ज़रिए उस भावना को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहते हैं।

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