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Bihar: एक साथ 6 बॉक्सन रेक को जोड़कर चलाई गई 354 वैगन वाली ‘रूद्रास्त्र’ मालगाड़ी, भारतीय रेल का नया कीर्तिमान

Thu, 07 Aug 2025 08:04 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर

सार

Bihar: ‘रूद्रास्त्र‘‘ का सफल संचालन डीडीयू मंडल की बेहतर काम करने की क्षमता, विभागों के बीच तालमेल और अच्छे प्रबंधन का उदाहरण है। इससे माल ढुलाई की रफ्तार और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। अगर इन मालगाड़ियों को अलग-अलग चलाया जाता तो इन सभी के लिए छह बार अलग-अलग मार्ग और चालक दल की व्यवस्था करनी पड़ती।
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354 वैगन वाली ‘रूद्रास्त्र’ मालगाड़ी चलाई गई - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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माल ढुलाई की क्षमता और काम की कुशलता बढ़ाने की दिशा में पूर्व मध्य रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल (डीडीयू मंडल) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 07.08.2025 को डीडीयू मंडल के गंजख्वाजा स्टेशन से पूरे भारतीय रेल में पहली बार छह खाली बॉक्सन रेक को जोड़कर बनाई गई ‘‘रूद्रास्त्र‘‘ नाम की लंबी मालगाड़ी को सफलतापूर्वक चलाया गया। यह मालगाड़ी करीब 4.5 किलोमीटर लंबी रही, जो अब तक भारतीय रेल की सबसे लंबी मालगाड़ी है । आज ‘‘रूद्रास्त्र‘‘ द्वारा 05.00 घंटे में 40 किलोमीटर की औसत स्पीड से गंजख्वाजा स्टेशन से गढ़वा रोड स्टेशन तक की 200 किलोमीटर की दूरी तय की गयी ।

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‘‘रूद्रास्त्र‘‘ को छह खाली बॉक्सन रेक को जोड़कर तैयार किया गया, जिसमें कुल 354 वैगन शामिल हैं। इस मालगाड़ी को चलाने के लिए 07 इंजन लगाए गए। गंजख्वाजा स्टेशन से सभी छह रेक को जोड़कर बनी 'रूद्रास्त्र' मालगाड़ी को दोपहर 2:20 बजे गढ़वा रोड के लिए रवाना किया गया। यह मालगाड़ी डीडीयू मंडल के गंजख्वाजा से सोननगर तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर और उसके बाद गढ़वा रोड की ओर भारतीय रेल के सामान्य ट्रैक पर चली। 

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पूर्व मध्य रेल का पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल भारतीय रेल के सबसे अहम मंडलों में से एक है, जो धनबाद मंडल को कोयला और अन्य सामान लादने के लिये लगातार समय से खाली मालगाड़ी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। यहां मालगाड़ियों के डिब्बों की जांच और मरम्मत बड़े पैमाने पर की जाती है। जांच के बाद पूरी तरह ठीक डिब्बों को जोड़कर मालगाड़ी तैयार की जाती है, जिसे आगे धनबाद मंडल को भेजा जाता है ताकि वहां सामान लादा जा सके।
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‘‘रूद्रास्त्र‘‘ का सफल संचालन डीडीयू मंडल की बेहतर काम करने की क्षमता, विभागों के बीच तालमेल और अच्छे प्रबंधन का उदाहरण है। इससे माल ढुलाई की रफ्तार और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। अगर इन मालगाड़ियों को अलग-अलग चलाया जाता तो इन सभी के लिए छह बार अलग-अलग मार्ग और चालक दल की व्यवस्था करनी पड़ती। रुद्रास्त्र के रूप में एक साथ चलने से उल्लेखनीय रूप से समय की बचत होगी तथा और ज्यादा ट्रेन चलाने के लिए मार्ग भी उपलब्ध होगा। 4.5 किलोमीटर लंबी 'रूद्रास्त्र' मालगाड़ी का सफल संचालन डीडीयू मंडल की नई सोच और नवाचार की शानदार मिसाल है।

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