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बिहार: बाढ़ राहत व्यवस्था की खुली पोल, सेवानिवृत्त शिक्षकों को बना दिया आश्रय स्थल-सामुदायिक किचन का प्रभारी

Tue, 08 Sep 2026 01:40 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

वैशाली के राघोपुर प्रखंड में बाढ़ राहत आश्रय स्थलों और सामुदायिक किचन के संचालन के लिए अंचल कार्यालय की ओर से जारी सूची में गंभीर लापरवाही सामने आई है। सूची में ऐसे कई प्रधानाध्यापकों के नाम प्रभारी के तौर पर दर्ज हैं, जो महीनों पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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अंचल कार्यालय से जारी सूची - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के वैशाली जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर प्रखंड से प्रशासनिक लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बाढ़ जैसी आपदा से निपटने और पीड़ितों तक तत्काल राहत पहुंचाने के लिए अंचल कार्यालय की ओर से जारी की गई आधिकारिक सूची में ऐसी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है, जिसने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची में कई ऐसे शिक्षकों को बाढ़ राहत आश्रय स्थलों और सामुदायिक किचन का प्रभारी बनाया गया है, जो महीनों पहले ही अपने पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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मामला सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि बाढ़ की आपात स्थिति में राहत और बचाव के लिए जारी की गई सूची ही अपडेट और सत्यापित नहीं है, तो जरूरत के समय प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह काम करेगी। इस पूरी घटना ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंचल कार्यालय ने 20 पंचायतों के लिए जारी की सूची

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राघोपुर अंचल कार्यालय ने प्रखंड की 20 पंचायतों में बाढ़ राहत आश्रय स्थलों और सामुदायिक किचन के संचालन को लेकर एक आधिकारिक सूची तैयार कर जारी की है। इस सूची में पंचायत का नाम, चयनित आश्रय स्थल, सामुदायिक किचन का स्थान, नोडल पदाधिकारी, प्रभारी और तैनात अन्य कर्मियों के नाम के साथ उनके मोबाइल नंबर भी दर्ज किए गए हैं।

इस सूची को तैयार करने का उद्देश्य यह था कि बाढ़ की स्थिति में पीड़ित लोगों और राहत-बचाव में जुटी टीमों को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल संपर्क करने में परेशानी न हो। लेकिन सूची के जमीनी स्तर पर सत्यापन को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इसमें ऐसे नाम शामिल मिले हैं, जो संबंधित पदों से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

सूची में पांच सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापकों के नाम

सूची की छानबीन के दौरान कम से कम पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के नाम बाढ़ आश्रय स्थल और सामुदायिक किचन के प्रभारी के तौर पर दर्ज होने की बात सामने आई है, जबकि ये शिक्षक काफी समय पहले शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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सूची में शामिल नामों में उमानाथ राय, प्रधानाध्यापक, उच्च माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर तीनपैरिया का नाम है, जो गत 31 मई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके अलावा सुरेश साह, प्रधानाध्यापक, उच्च माध्यमिक विद्यालय जमालपुर दिसंबर
महीने में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

इसी तरह सरोज कुमार सिंह, प्रधानाध्यापक, कमल सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय राघोपुर नवंबर महीने में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अशोक प्रसाद मेहता, प्रधानाध्यापक, माध्यमिक विद्यालय चांदपुरा भी 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सूची में चंदेश्वर प्रसाद, प्रधानाध्यापक, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सरायपुर का नाम भी शामिल है।

सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक बोले- फोन से मिली जानकारी, सूची देखकर हैरानी हुई

मामले को लेकर माध्यमिक विद्यालय चांदपुरा के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अशोक प्रसाद मेहता ने हैरानी जताई। उन्होंने बताया कि उन्हें परिचितों और स्थानीय लोगों के फोन कॉल के जरिए जानकारी मिली कि उनका नाम अभी भी सक्रिय प्रभारियों की सूची में दर्ज है। मेहता के मुताबिक, वह 31 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके अलावा सुरेश साह, सरोज कुमार सिंह और उमानाथ राय भी कई महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अपने सेवानिवृत्त होने की जानकारी विभाग और स्थानीय स्तर पर पहले ही दी जा चुकी थी। इसके बावजूद बिना जमीनी सत्यापन के उनके और अन्य सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम बाढ़ आश्रय स्थल और सामुदायिक किचन के प्रभारी के तौर पर सूची में शामिल कर दिए गए।

बाढ़ के समय राहत व्यवस्था कैसे चलेगी, उठ रहे गंभीर सवाल

राघोपुर प्रखंड बाढ़ और कटाव की आशंका वाले क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में आपदा प्रबंधन से जुड़ी सूची में इस तरह की गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव की व्यवस्था पूरी तरह तत्काल प्रतिक्रिया और सही समन्वय पर निर्भर करती है।
लोगों का सवाल है कि यदि प्रशासन की ओर से जारी सूची में पुराने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम और संपर्क नंबर दर्ज रहेंगे, तो अचानक बाढ़ आने की स्थिति में राहत टीमों को वास्तविक प्रभारी तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।

‘ऐन वक्त पर चरमरा सकती है व्यवस्था’

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसी आपदा के समय यदि सूची में दर्ज नंबरों पर संपर्क किया जाए और संबंधित व्यक्ति अपने पद पर ही नहीं हों, तो राहत व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। लोगों ने इस मामले को प्रशासनिक संवेदनशीलता से जोड़ते हुए कहा कि आपदा से पहले तैयार की जाने वाली सूचियों का नियमित सत्यापन बेहद जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जब प्रशासनिक रिकॉर्ड में शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने की जानकारी मौजूद थी, तो उन्हें राहत केंद्रों और सामुदायिक किचन की जिम्मेदारी वाली सूची में कैसे शामिल कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही सूची

अंचल कार्यालय की ओर से जारी यह सूची अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हो रही है। सूची में सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम सामने आने के बाद राघोपुर क्षेत्र में यह मामला चर्चा और आलोचना का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोग अब इस मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि सूची की तत्काल दोबारा जांच कर उसे अपडेट किया जाए, वास्तविक प्रभारियों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज किए जाएं तथा इस तरह की गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

अंचल कार्यालय से जारी सूची में दर्ज हैं नाम और मोबाइल नंबर

राघोपुर अंचल कार्यालय की ओर से जारी सूची में संबंधित पंचायतों, बाढ़ राहत आश्रय स्थलों, सामुदायिक किचन, नोडल पदाधिकारियों और प्रभारियों के नाम के साथ मोबाइल नंबर भी दर्ज किए गए हैं। इसी सूची में सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर सूची के सत्यापन की जरूरत और बढ़ गई है।

 

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