मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सारण जिले के डुमरी बुजुर्ग में सहयोग शिविर का शुभारंभ किया। सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी स्वतः निलंबित माने जाएंगे।
सहयोग शिविर और हेल्पलाइन की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर शिविर का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में सहयोग शिविर की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से आम लोग सीधे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे और उनकी मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होगी। उन्होंने बताया कि 11 मई को सरकार ने सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 जारी किया था। अब पंचायत स्तर पर हर महीने दूसरे और चौथे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाए जाएंगे, जहां अंचल, ब्लॉक, शिक्षा, थाना समेत विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
शिकायत समाधान में देरी पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन मिलने के 10 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस मुख्यमंत्री कार्यालय से जाएगा। 20 दिन पूरे होने पर दूसरा नोटिस और 25वें दिन तीसरा नोटिस भेजा जाएगा। इसके बावजूद 30 दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने पर 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित हो जाएगा।
सारण के विकास को लेकर बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने सारण के विकास से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस क्षेत्र को गोद लेने की घोषणा की गई थी और अब यहां एयरपोर्ट तथा टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है। बाबा हरिहरनाथ के नाम पर टाउनशिप विकसित होगी।
छपरा में बनेगा गंगा-अंबिका पथ
उन्होंने कहा कि छपरा में पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर गंगा-अंबिका पथ का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही नोएडा की तर्ज पर आधुनिक शहर बसाने की योजना पर भी काम चल रहा है। राज्य में 211 स्थानों पर डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सख्त संदेश
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुमंडल अस्पतालों के डॉक्टर सामान्य बीमारी में मरीजों को रेफर कर देते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनावश्यक रेफर करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी।
ये भी पढ़ें:
एक्शन मोड में राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल; कल CO को किया था सस्पेंड, आज मुजफ्फरपुर में सुनेंगे शिकायतें
15 अगस्त तक बेहतर इलाज का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 15 अगस्त तक जिला और अनुमंडल अस्पतालों में बेहतर इलाज की व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाएगी। अगर मरीज को बिना गंभीर बीमारी के पटना रेफर किया जाता है तो सिविल सर्जन पर कार्रवाई की जाएगी।