मणिका मन सावन के बाद अब भादो में भी सूखा
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तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत मुजफ्फरपुर स्थित प्राचीन और पर्यटन की दृष्टि से चर्चित मणिका मन इन दिनों पानी की कमी से जूझ रहा है। सावन और भादो जैसे बारिश के महीनों के अंतिम दौर में भी मणिका मन का अधिकांश हिस्सा सूखा पड़ा है। पानी घटने के कारण इस जलाशय का अस्तित्व संकट में है।
बिहार में वर्षा का बड़ा हिस्सा उत्तर-पूर्वी मानसून से आता है, लेकिन इस बार बारिश कम हुई। इसी का असर मणिका मन पर भी पड़ा है। सामान्य तौर पर बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर मन का अधिकांश भाग रिचार्ज हो जाता है, मगर इस बार नदी में भी जलस्तर घटा हुआ है। नतीजतन 200 एकड़ में फैले इस मन को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना फिलहाल मुश्किल में फंस गई है।
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जानकारी के अनुसार, लगभग 124.26 एकड़ भूमि को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना हाल ही में जिला प्रशासन ने तैयार कर पर्यटन विभाग को भेजी थी। यहां दिल्ली के दिल्ली हाट की तर्ज पर इसे विकसित करने का खाका खींचा गया है। कभी यह मन प्रवासी पक्षियों की वजह से पर्यावरण प्रेमियों का आकर्षण केंद्र हुआ करता था। लेकिन अब इसमें पानी की कमी से जगह-जगह खर-पतवार और जंगल उग आए हैं, जिससे सौंदर्यीकरण की राह कठिन हो गई है।
पिछले वर्ष जनवरी 2025 में जिला प्रशासन की देखरेख में मापी कराई गई थी। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर पर्यटन विभाग को भेजी गई। विभाग ने इस पर सहमति भी दे दी है और योजना को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
मुशहरी प्रखंड सह अंचल अधिकारी महेंद्र शुक्ला ने बताया कि मणिका मन का विकास पर्यटन विभाग के माध्यम से किया जाना है। विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और डीपीआर पहले से तैयार है। जल्द ही लक्ष्य निर्धारित कर काम शुरू कर दिया जाएगा।