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Bihar: 34 साल पुराने गोलीकांड में चार दोषियों को 10-10 साल की सजा; 84 वर्षीय दोषी बुजुर्ग को भी हुई सजा

Tue, 02 Jun 2026 05:44 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

वैशाली के 34 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। एडीजे-1 कोर्ट ने चार दोषियों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि 84 वर्षीय एक दोषी को उम्र के आधार पर तीन साल की सजा के साथ प्रोबेशन का लाभ दिया गया।
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मामले में 34 साल बाद पांच दोषियों को मिली सजा।
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विस्तार
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वैशाली जिले के जुरवनपुर थाना में दर्ज वर्ष 1992 के एक मामले में अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। करीब 34 वर्ष बाद आए इस फैसले का लोगों ने स्वागत किया है। मामले में 84 वर्षीय दीपा राय को भी दोषी ठहराया गया है। एडीजे-1 मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई है। वहीं अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

लोक अभियोजक श्याम बाबू राय ने बताया कि यह मामला वर्ष 1992 का है। जुरवनपुर थाना क्षेत्र में अदालत राय अपनी पत्नी के साथ घर पर बैठे थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनके घर जाने वाले रास्ते पर कुछ लोग शीशे के टुकड़े बिछा रहे हैं। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन पर गोली चला दी। गोली लगने से वे घायल हो गए। मामले की जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

ट्रायल के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई

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उन्होंने बताया कि इस मामले में कुल नौ आरोपी थे। ट्रायल के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। अभियुक्तों द्वारा मुकदमे को लंबा खींचने का प्रयास किया गया, लेकिन अपर लोक अभियोजक ख्वाजा हसन ने मामले की प्रभावी पैरवी की। सभी गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और मेडिकल रिपोर्ट सहित सभी आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

न्यायालय ने सभी पांच आरोपियों को दोषी पाया। 26 मई को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई थी, जिसके बाद मंगलवार को फैसला सुनाया गया। 84 वर्षीय दीपा राय पहले से जमानत पर थे। उनकी अधिक आयु को देखते हुए न्यायालय ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाते हुए प्रोबेशन का लाभ दिया, जिससे उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। वहीं अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

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लोक अभियोजक ने कहा कि करीब 34 वर्ष बाद आए इस फैसले से समाज और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को स्पष्ट संदेश मिला है कि अपराध करने वालों को देर-सबेर सजा अवश्य मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पहले से जमानत पर है और उसे तीन वर्ष या उससे कम की सजा होती है, तो उसे अपील करने के लिए प्रोबेशन अथवा जमानत का लाभ दिया जा सकता है और उसे तत्काल जेल नहीं भेजा जाता।

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