बिहार के बेतिया में ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक नवजात शिशु को उसके माता-पिता सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए। घटना के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है, जितनी मुंह उतनी बातें सुनने को मिल रही हैं। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। घटना बगहा पुलिस जिले के धनहा थाना क्षेत्र की है। जो घटना इंसानियत को झकझोर देने वाली है।
जहां एक निर्दयी माता-पिता ने अपनी ही नवजात बच्ची को सड़क किनारे फेंक दिया। लेकिन जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो...यह लोकोक्ति चरितार्थ हो रही है। बताया जाता है, नवजात शिशु पर एक स्थानीय व्यक्ति की नजर पड़ी और वह उसकी जान बचाया। मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह उदय कुशवाहा नामक व्यक्ति अपने किसी काम के सिलसिले में जा रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि बाइक पर सवार दो लोग रास्ते से गुजरे और सड़क किनारे कुछ फेंककर चले गए। पहले तो उन्हें लगा कि कोई सामान गिरा है, लेकिन जब उन्होंने बच्चे की रोने की आवाज सुनी, तो पास जाकर देखा एक नवजात बच्ची ठंड में ठिठुरती हुई पड़ी थी।
सौभाग्य से बच्ची एक गन्ने के पत्ते पर गिरी थी, जिससे उसे चोट नहीं आई। बच्ची को रोते देखकर उदय कुशवाहा ने बिना समय गंवाए तुरंत पुलिस को सूचना दी। डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को प्राथमिक इलाज के लिए PHC ले गई। पीएचसी में इलाज कर रहे डॉक्टर अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि इसकी सूचना प्रशासन को दी गई है। सूचना पर बेतिया से अनुमंडलीय अस्पताल में एक टीम पहुंची है। फिलहाल नवजात शिशु को अनुमंडलीय अस्पताल बगहा भेजा जा रहा है। आगे की कार्रवाई वहीं पर होगी।
उन्होंने बताया कि बच्ची की स्थिति सामान्य है। प्रशासन के निर्देश पर बच्ची को अनुमंडलीय अस्पताल बगहा रेफर कर दिया गया। जहां उसका उचित इलाज चल रहा है। इधर, जिस व्यक्ति ने नवजात को सबसे पहले देखा और उसे बचाया, उन्होंने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई है। उदय कुशवाहा ने प्रशासन से अनुरोध किया कि वह इस मासूम को अपनाना चाहते हैं और उसका लालन-पालन करना चाहते हैं।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्ची को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे किसी को सौंपा जाएगा। वहीं, इस हृदयविदारक घटना ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी रही होगी कि माता-पिता को अपनी ही नवजात बच्ची को फेंकने पर मजबूर होना पड़ा? क्या यह गरीबी का परिणाम है, सामाजिक दबाव का असर है या फिर कोई और वजह, अब कारण जो हो, लेकिन यह सच है कि बगहा के जागरुक नागरिकों और पुलिस प्रशासन की तत्परता से इस मासूम की जान बच गई है।