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Bihar: सप्तक्रांति सुपरफास्ट बनी शराब तस्करों की पसंदीदा ट्रेन? पैंट्रीकार से शराब की बोतलें बरामद, मचा हड़कंप

Mon, 29 Jun 2026 12:28 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिमी चंपारण

सार

सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस के पैंट्रीकार से आरपीएफ ने 62 बोतल विदेशी शराब बरामद कर मैनेजर अजय कुमार को गिरफ्तार किया है। इसी ट्रेन से पहले भी शराब बरामद हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं के बाद शराब तस्करी के नेटवर्क और रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

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आरपीएफ ने जब्त की विदेशी शराब - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आनंद विहार से मुजफ्फरपुर जाने वाली 12558 सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस एक बार फिर शराब तस्करी को लेकर सुर्खियों में है। ट्रेन के पैंट्रीकार से भारी मात्रा में ब्रांडेड विदेशी शराब बरामद होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और तस्करी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नरकटियागंज आरपीएफ ने बगहा निवासी मनीष कुमार की सूचना पर कार्रवाई करते हुए ट्रेन के पैंट्रीकार की तलाशी ली। आरपीएफ पोस्ट कमांडर आर.आर. कश्यप ने बताया कि तलाशी के दौरान एक ट्रॉली बैग और एक पिट्ठू बैग से 62 बोतल ब्रांडेड विदेशी शराब बरामद की गई। इस मामले में पैंट्रीकार मैनेजर अजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। मनीष कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने शराब तस्करी की सूचना देने का प्रयास किया, तब मैनेजर अजय कुमार ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने बताया कि इस मामले में वह एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।

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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी इसी सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस के पैंट्रीकार से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की गई थी। उस कार्रवाई में भी पैंट्रीकार मैनेजर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बावजूद ट्रेन के माध्यम से शराब तस्करी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि बरामद शराब किसकी थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था, इसकी जांच की जा रही है। वहीं, सूत्रों के अनुसार, शराब जब्ती के बाद मामले को प्रभावित करने की कोशिश भी की गई, लेकिन कार्रवाई जारी रही।

आखिर कौन है मास्टरमाइंड?
लगातार एक ही ट्रेन के पैंट्रीकार से शराब की बरामदगी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि पहले भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी थी, तो फिर तस्करी दोबारा कैसे होने लगी? क्या तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का डर नहीं रहा, या फिर उनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह मास्टरमाइंड कौन है, जिसके इशारे पर पैंट्रीकार का इस्तेमाल शराब तस्करी के लिए किया जा रहा है। अब तक गिरफ्तारियां तो हुई हैं, लेकिन इस पूरे नेटवर्क के सरगना तक जांच एजेंसियां नहीं पहुंच सकी हैं।
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पुलिस की सूचना व्यवस्था पर भी उठे सवाल
लगातार हो रही बरामदगी के बाद रेल पुलिस और आरपीएफ की खुफिया सूचना प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि एक यात्री की सूचना पर इतनी बड़ी कार्रवाई संभव है, तो पुलिस का सूचना तंत्र पहले क्यों सक्रिय नहीं हो सका? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रेल पुलिस और आरपीएफ इस शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसके मास्टरमाइंड का पर्दाफाश कर पाएंगी, या फिर सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस का पैंट्रीकार शराब तस्करों का सुरक्षित ठिकाना बना रहेगा।

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