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Bihar Election: ससुर दो-दो बार विधायक-सांसद, अब भाजपा छोड़ जन सुराज में जुड़े तो बहू को टिकट; सुरसंड में चर्चा

Thu, 09 Oct 2025 05:22 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी

सार

Bihar Vidhansabha Chunav 2025: उषा किरण का परिवार वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके ससुर सीताराम यादव का नाम सीतामढ़ी की राजनीति में एक बड़ा चेहरा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नयाटोल पंचायत के मुखिया और नानपुर ब्लॉक प्रमुख के रूप में की थी। पढ़ें उनके बारे में
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उषा किरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीतामढ़ी जिले की सुरसंड विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है। इस बार यहां से उम्मीदवार बनी हैं, उषा किरण, जिनकी सियासी पृष्ठभूमि मजबूत रही है। 48 वर्षीय उषा किरण को जन सुराज पार्टी से टिकट मिला है। वे पहले जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं और अब विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने जा रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके ससुर सीताराम यादव, जो कभी आरजेडी के कद्दावर नेता रहे हैं, आज अपनी बहू को जीताने के लिए मैदान में डटे हैं।

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राजनीति में परिवार की गहरी जड़ें
उषा किरण का परिवार वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके ससुर सीताराम यादव का नाम सीतामढ़ी की राजनीति में एक बड़ा चेहरा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नयाटोल पंचायत के मुखिया और नानपुर ब्लॉक प्रमुख के रूप में की थी। इसके बाद वे 1990 में जनता दल के टिकट पर पुपरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 1995 में दोबारा इसी सीट से जीतकर उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा। बाद में जब यह क्षेत्र पुनर्संरचना के बाद सुरसंड विधानसभा कहलाने लगा, तब भी यादव परिवार की पकड़ यहां मजबूत बनी रही। 

ससुर की विरासत संभालने मैदान में बहू
सीताराम यादव का राजनीतिक सफर काफी रोचक रहा है। वे दो बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। 1998 में वे आरजेडी के टिकट पर सीतामढ़ी लोकसभा से सांसद चुने गए। 2004 में दोबारा लोकसभा पहुंचे। बीच में उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया, जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। अब वे जन सुराज आंदोलन से जुड़ चुके हैं और अपनी बहू उषा किरण को विजयी बनाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यादव परिवार की क्षेत्र में गहरी पैठ और संगठनात्मक अनुभव, उषा किरण के लिए मजबूत पूंजी साबित हो सकती है।
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शिक्षित और जमीन से जुड़ी उम्मीदवार
उषा किरण की पहचान एक शिक्षित और संवेदनशील नेत्री के रूप में है। उन्होंने B.Sc. (Zoology) की पढ़ाई की है। अपने जिले में वे कई सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं, खासकर महिला सशक्तिकरण और शिक्षा को लेकर। जिला परिषद सदस्य के रूप में उनके कार्यकाल को भी लोगों ने सराहा है। वे अब इस अनुभव को विधानसभा की राजनीति में बदलने की कोशिश में हैं।
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सुरसंड में रोचक मुकाबले के आसार
सुरसंड सीट पर इस बार का मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। एक ओर यादव परिवार की पुरानी राजनीतिक जड़ें और सीताराम यादव का अनुभव है, वहीं अन्य दलों के उम्मीदवारों की रणनीति भी तेजी से बदल रही है। क्षेत्र में यादव, ब्राह्मण और अति पिछड़ा वर्ग के वोटरों की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। ऐसे में उषा किरण के लिए यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की लड़ाई भी है।

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