पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा से लापता हुई छठी कक्षा की 12 वर्षीय छात्रा को करीब छह महीने बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से सकुशल बरामद कर लिया गया है। बच्ची के मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली है, लेकिन उसकी आपबीती ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
कोचिंग जाते समय हुआ अपहरण
पीड़िता के अनुसार 25 जुलाई 2025 को वह रोज की तरह कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में गांव के ही एक बुजुर्ग ने उसे चाय पिलाई, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसने खुद को उत्तराखंड के हल्द्वानी में पाया, जहां से उसकी पीड़ा भरी यात्रा शुरू हुई।
उत्तराखंड में अमानवीय प्रताड़ना
बच्ची ने पुलिस को बताया कि उत्तराखंड में उसे अलग-अलग जगहों पर रखा गया और शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट की जाती थी। उसे और उसके माता-पिता के झूठे नाम व पहचान रटने के लिए मजबूर किया जाता था और भूलने पर पीटा जाता था।
बच्ची को बेच दिया गया
पीड़िता के अनुसार बाद में उसे दूसरे लोगों को बेच दिया गया, जिससे उसकी पीड़ा और बढ़ती चली गई। इस दौरान बच्ची के माता-पिता और रिश्तेदार थाना, एसडीपीओ, एसपी से लेकर डीआईजी कार्यालय तक लगातार अपनी बेटी की तलाश में भटकते रहे, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
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गोरखपुर में मिला सहारा
कुछ समय बाद बच्ची को गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में रखा गया। वहां मौका पाकर वह भाग निकली और एक निजी क्लीनिक पहुंची। महिला डॉक्टर ने उसकी हालत देखकर तुरंत डायल 112 पर यूपी पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
सूचना मिलते ही बगहा पुलिस परिजनों के साथ गोरखपुर पहुंची और औपचारिक प्रक्रिया के बाद बच्ची को अपने संरक्षण में लिया। नगर थाना में पीड़िता का बयान दर्ज कर उसे सुरक्षा के मद्देनजर महिला थाना भेजा गया है। बगहा एसडीपीओ कुमार देवेंद्र ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, आरोपियों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और न्यायालय में बयान के बाद बच्ची को परिजनों को सौंपा जाएगा।