बिहार में भाजपा से मतदाताओं के एक समूह के रुख ने पार्टी में सुधार के लिए सुगबुगाहट पैदा कर दी है। कई नेताओं का मानना है कि पार्टी नेतृत्व को हाल के एमएलसी चुनावों और एक विधानसभा उपचुनाव के अंतर्निहित संदेश पर ध्यान देना होगा। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि हार के कुछ संकेत स्पष्ट हैं, जिसमें केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस द्वारा पासवान मतदाताओं को अपनी झोली में रखने के सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दांव के वांछित परिणाम नहीं आए हैं। चिराग पासवान के विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान पासवान समुदाय की उनके साथ सहानुभूति नजर आई है।
सुशील मोदी बोले, आत्ममंथन का समय
पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को कई ट्वीट कर कहा कि हाल के एमएलसी चुनावों में भाजपा-जद (यू) गठबंधन को 10 सीटों का नुकसान और बोचहा विधानसभा उपचुनाव में राजद की जीत गहन आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में अति पिछड़ी जातियों और उच्च जातियों के एक वर्ग का पार्टी से दूर जाना अप्रत्याशित है। मोदी निषाद, नाविकों के एक पिछड़े समुदाय और पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार भूमिहारों के बीच भाजपा के वोटों के नुकसान का जिक्र कर रहे थे।
लालू को विरोध करने वाले भूमिहारों का मिल रहा समर्थन
नाम नहीं उजागर करने की शर्त के साथ राज्य के कुछ पार्टी नेताओं ने कहा कि इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि एमएलसी चुनावों में राजद के तीन जीतने वाले उम्मीदवार भूमिहार थे, जिससे लालू प्रसाद यादव के समर्थन की नई संभावना जगी है। दशकों तक इन्होंने लालू और उनकी पार्टी का जमकर विरोध किया है।
एमएलसी चुनाव में एनडीए ने जहां कुल 24 में से 13 सीटें जीतीं, वहीं उसे कई सीटों पर अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। पार्टी के एक नेता ने आगाह किया कि एमएलसी चुनावों को सामान्य नजरिए से देखना सही नहीं होगा जिसमें केवल स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों ने मतदान किया था। इस स्थिति पर चिंतन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा नेतृत्व हर चुनाव को गंभीरता से लेता है। वे निश्चित रूप से सुधारात्मक कदम उठाएंगे जो उन्हें उचित लगेगा।
बिहार ने ट्रांसजेंडर को सरकारी योजनाओं में शामिल करने के लिए प्रकिया शुरू की
बिहार सरकार ने राज्य में ट्रांसजेंडर की गिनती की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में लाया जा सके। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार ने बताया कि कोविड-19 की वजह से प्रक्रिया धीमी हो गई थी और केवल 20-25 ट्रांसजेंडर लोगों को ही पिछले दो साल में पहचान पत्र जारी किए गए हैं।