दो माह की बेटी संग दंडवत यात्रा पर निकला दंपती
- फोटो : Amar Ujala
श्रावणी मेले में इस बार आस्था और संकल्प की दो अनोखी तस्वीरें श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। पहली तस्वीर मुजफ्फरपुर निवासी मिथलेश कुमार के परिवार की है, जो अपनी दो माह की बेटी को विशेष डोली में साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं। वहीं, दूसरी तस्वीर हरिद्वार निवासी दिव्यांग शिवभक्त बबलू की है, जो एक पैर और बैसाखी के सहारे कांवर लेकर सुल्तानगंज से देवघर की कठिन यात्रा पूरी करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
पत्नी-बेटा और बेटी के साथ कर रहे हैं दंडवत यात्रा
मुजफ्फरपुर के मिथलेश कुमार अपनी पत्नी रेखा देवी, तीन वर्षीय पुत्र आयुष और दो माह की बेटी राधा कुमारी के साथ दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों से वह बाबा धाम की दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने पुत्री प्राप्ति की मन्नत मांगी थी और संकल्प लिया था कि बेटी होने पर उसे विशेष डोली में साथ लेकर बाबा के दरबार पहुंचेंगे। मन्नत पूरी होने के बाद पूरा परिवार इस कठिन यात्रा पर निकल पड़ा है। मिथलेश ने कहा कि कई लोगों ने इतनी छोटी बच्ची को साथ ले जाने से मना किया, लेकिन उन्हें बाबा बैद्यनाथ पर अटूट विश्वास है। उनका कहना है कि बेटी भाग्य नहीं, सौभाग्य होती है और बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती हैं।
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दृश्य देखकर कांवरिये भावुक हुए
दूसरी ओर, असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर हरिद्वार निवासी दिव्यांग शिवभक्त बबलू अपनी अद्भुत आस्था का परिचय दे रहे हैं। एक पैर और बैसाखी के सहारे वह सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा धाम की ओर बढ़ रहे हैं। रास्ते में भक्ति गीत सुनकर उन्होंने बैसाखी छोड़ उत्साहपूर्वक नृत्य भी किया, जिसे देखकर अन्य कांवरिये भावुक हो उठे। श्रावणी मेले में सामने आई ये दोनों तस्वीरें यह संदेश देती हैं कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास के सामने शारीरिक चुनौतियां और कठिन रास्ते भी छोटे पड़ जाते हैं। बाबा बैद्यनाथ के प्रति भक्तों की ऐसी आस्था हर किसी के लिए प्रेरणा बन रही है।