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Kalpvas Mela : कभी राजा दशरथ भी आए थे कल्पवास मेले में, आज से 15 नवंबर तक सिमरिया का रूप निखरा

Thu, 17 Oct 2024 09:20 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय

सार

Kalpvas 2024 : गंगा के इस तट पर राजा दशरथ भी कल्पवास करने आए थे। कल्पवास की इस अनोखी परंपरा में देश भर के लोग आते हैं। वहीं, यह मिथिलांचल और नेपाल देश के लोगों के लिए खास महत्व रखता है।
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मेले का उद्घाटन करते हुए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेगूसराय जिले के गंगा तट सिमरिया में लगने वाले एशिया के प्रसिद्ध राजकीय कल्पवास मेले की शुरुआत आज यानी गुरुवार से शुरू हो चुकी है। मेले का उद्घाटन बिहार सरकार के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता और बेगूसराय के डीएम तुषार सिंगला के द्वारा किया गया। इस दौरान इस कल्पवास मेला के उद्घाटन में शामिल बेगूसराय के विधायक कुंदन कुमार सहित कई नेता शामिल हुए।

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कल्पवास मेले को लेकर बेगूसराय के डीएम तुषार सिंगला ने बताया है कि आज से कल्पवास मेले की शुरुआत हो चुकी है। वहीं, कल्पवास मेले को लेकर तैयारी पूरी तरह से हो चुकी है और यहां पर जो भी सुविधा कल्पवासी को होनी चाहिए, वह सारी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया है कि काफी संख्या में पुलिस बल को सिमरिया गंगा तट पर लगाया गया है, क्योंकि कल्पवासी दूर से आते हैं। काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

उन्होंने बताया है कि 17 अक्तूबर से 15 नवंबर तक कल्पवास मेला का आयोजन चलेगा। उन्होंने बताया है कि जो भी सुविधा कमी है। उसको भी जल्दी पूरा कर लिया जाएगा। इस दौरान खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता ने बताया है कि कल्पवास मेला राजकीय कल्पवास मेला है और सरकार के द्वारा कल्पवासी के लिए सारी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिला प्रशासन के द्वारा भी व्यवस्था पूरी तरह से की गई है।
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वहीं, इसके लिए पूरे गंगा घाट को बेहतर तरीके से सजाया गया है। जो एक विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रहा हैं। वहीं, प्रशासन की तरफ से आम कल्पवासियों के लिए जिला प्रशाशन ने खास उपाय किए हैं। बताते चलें कि बेगूसराय के सिमरिया के गंगा तट पर लगने वाला कल्पवास मेले का अपना महत्व है। माना जाता है कि गंगा के इस तट पर राजा दशरथ भी कल्पवास करने आए थे। कल्पवास की इस अनोखी परंपरा में देश भर के लोग आते हैं। वहीं, यह मिथिलांचल और नेपाल देश के लोगों के लिए खास महत्व रखता है।

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कल्पवास की यह अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि राजा दशरथ भी यहां कल्पवास के लिए आए थे। गंगा के तट पर एक छोटी सी झोपड़ीनुमा घर में पूरे एक महीने तक रहने वाले हजारों लोग आपसी सद्भाव का भी बड़ा उदाहरण हैं। जहां जाति, वर्ण और अमीरी-गरीबी को भूलकर पूरे एक महीने एक साथ रहते हैं।

इसकी 24 घंटे की दिनचर्या के साथ गंगा की आरती और पूजा पाठ चलता रहता है। इस दौरान कल्पवास करने आए कल्पवासी का कहना है कि एक महीने तक इसी गंगा तट पर रहकर कल्पवास करते हैं। उन्होंने बताया कि कल्पवास करने से आत्मा को शांति मिलती है। इस दौरान उन्होंने बताया कि कल्पवासी नेपाल और भूटान सहित देश के कई राज्यों से यहां लोग कल्पवास करने के लिए पहुंचते हैं।

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