Bihar: डॉ. रंजीत की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही सामने आई, जेल परिसर के सुरक्षाकर्मियों में हैरानी फैल गई। सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि डॉ. रंजीत नियमित रूप से समस्तीपुर से आकर ड्यूटी करते थे और उनके व्यवहार से किसी तरह का संदेह नहीं था।
नीट परीक्षा सॉल्वर गैंग मामले में गिरफ्तार किए गए डॉ. रंजीत कुमार पिछले एक साल से बेगूसराय मंडल कारा में कॉन्ट्रेक्ट पर चिकित्सक के पद पर कार्यरत था। वे रोजाना समस्तीपुर जिले स्थित अपने पैतृक आवास से बेगूसराय आकर ड्यूटी करता था। सूत्रों के अनुसार, डॉ. रंजीत की बहाली बिहार सरकार द्वारा अनुबंध के आधार पर की गई थी। हालांकि, उसकी सक्रियता सिर्फ जेल परिसर तक ही सीमित थी। बेगूसराय जिले के किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान में उनकी भूमिका नहीं थी। वहीं, समस्तीपुर जिले में उनका निजी क्लिनिक और अस्पताल संचालन से जुड़ाव था। बताया जा रहा है कि डॉ. रंजीत हाल ही में मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा क्षेत्र में आया था और इसी वजह से उनका संपर्क नीट परीक्षा से जुड़े छात्रों और अन्य संबंधित लोगों से बना हुआ था।
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही मंडल कारा में मचा हड़कंप
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉ. रंजीत की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही सामने आई, जेल परिसर के सुरक्षाकर्मियों में हैरानी फैल गई। सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि डॉ. रंजीत नियमित रूप से समस्तीपुर से आकर ड्यूटी करते थे और उनके व्यवहार से किसी तरह का संदेह नहीं था। गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर रंजीत से जुड़ी खबरें सोशल मीडिया, खासकर बेगूसराय के व्हाट्सएप ग्रुप्स में तेजी से वायरल हो रही हैं। मेडिकल जगत में भी इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
स्थानीय चिकित्सकों ने जताया आश्चर्य
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बेगूसराय के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डॉ. रंजीत काफी जूनियर थे और उनसे व्यक्तिगत बातचीत नहीं होती थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डॉ. रंजीत की बेगूसराय के चिकित्सा क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं थी। कोचिंग संचालकों से संबंध होने के सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।