बिहार के मुंगेर जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित महिला के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। अब महिला खुद को जिंदा साबित करने के लिए अपने पति के साथ नगर परिषद हवेली खड़गपुर के दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। इस मामले में महिला के पिता पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा है।
दरअसल, नगर परिषद हवेली खड़गपुर ने 16 नवंबर 2024 को यह प्रमाण पत्र जारी किया था। जब महिला को इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली, तो वह अपने पति के साथ न्याय की गुहार लगाने के लिए प्रशासन के पास पहुंची। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) राजीव रोशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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प्यार, शादी और फिर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का खेल
जानकारी के मुताबिक, यह मामला हवेली खड़गपुर प्रखंड के महकोला गांव से जुड़ा है। यहां के नवल किशोर बिंद के 27 वर्षीय पुत्र आनंद कुमार दिल्ली में रह रहे थे। वहीं, दिल्ली में ही अपने पिता और परिवार के साथ रह रही सत्तन बिंद की 20 वर्षीय बेटी संजना से आनंद की मुलाकात हुई। दोनों के बीच प्यार हुआ और 27 अक्तूबर 2024 को संजना अपने प्रेमी आनंद के साथ घर से चली गई।
इसके बाद 28 अक्तूबर 2024 को दोनों ने दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में प्रेम विवाह कर लिया। इस शादी से संजना का परिवार नाराज था, खासकर उसके पिता सत्तन बिंद। बेटी की शादी से गुस्साए पिता ने खड़गपुर नगर परिषद में जाकर उसकी झूठी मृत्यु दिखाकर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दे दिया। कुछ महीनों बाद, नगर परिषद ने संजना का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जिसमें उसे मृत घोषित कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर देखी अपनी 'मृत्यु' की खबर
संजना और आनंद अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश थे, लेकिन तभी उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि संजना को मृत घोषित कर दिया गया है। जब संजना ने अपना ही मृत्यु प्रमाण पत्र देखा, तो वह सन्न रह गई। इसके बाद वह अपने पति आनंद के साथ नगर परिषद हवेली खड़गपुर पहुंची, जहां अधिकारियों से बात करने पर यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि उसके पिता सत्तन बिंद ने ही उसका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया था। संजना ने अनुमंडल पदाधिकारी खड़गपुर को लिखित शिकायत दी और बताया कि उसके पिता ने नगर परिषद के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाया।
फर्जी प्रमाण पत्र के कारण आईं कई परेशानियां
संजना ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र के कारण उसे कई जरूरी कामों में परेशानी हो रही है। उसने नगर परिषद कार्यालय के कर्मचारियों और अपने पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जारी मृत्यु प्रमाण पत्र का पंजीकरण संख्या D-2024:10-90083-0000134 है, जिसे 16 नवंबर 2024 को जारी किया गया था। संजना ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ और जीवित है।
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दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
अनुमंडल पदाधिकारी राजीव रोशन ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसकी गहराई से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के जिन कर्मचारियों ने इसमें मिलीभगत की है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संजना के पिता दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
फिलहाल संजना अपने जिंदा होने का सबूत लेकर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही है, ताकि वह अपनी पहचान वापस पा सके और दोषियों को सजा दिला सके।