दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच जमुई में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। सिकंदरा थाना क्षेत्र के महादेव सिमरिया बेलदरिया गांव में रविवार को करंट की चपेट में आने से नौ वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची की पहचान महादेव सिमरिया बेलदरिया निवासी बबलू मांझी की पुत्री निभा कुमारी के रूप में हुई है। जिस बेटी की किलकारियों से घर में खुशियां गूंजती थीं, उसकी असमय मौत से परिवार में मातम पसर गया।
लेकिन पीड़ित पिता बबलू मांझी की पीड़ा यहीं खत्म नहीं हुई। बेटी निभा कुमारी को खोने के बाद उसे घर ले जाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। सदर अस्पताल में एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पिता अपनी मृत बेटी के शव को कंधे पर उठाकर सड़क पर वाहन की तलाश में भटकता रहा। दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच सामने आई इस घटना ने मानवीय संवेदनशीलता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करंट की चपेट में आने से बच्ची की मौत
मृत बच्ची के पिता बबलू मांझी ने बताया कि उनके घर का दरवाजा टीन का बना हुआ है। उन्हें आशंका है कि दरवाजे में करंट प्रवाहित हो रहा था, जिसकी चपेट में आने से निभा की जान चली गई।
बेटी को खोने के बाद शव ले जाने के लिए भी करना पड़ा संघर्ष
बेटी की मौत के बाद पिता उसे घर ले जाकर अंतिम विदाई देना चाहता था, लेकिन परिजनों के मुताबिक, अस्पताल से तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। दुख से टूट चुका पिता अपनी लाडली के शव को कंधे पर उठाकर अस्पताल से बाहर निकला और सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों से मदद मांगने लगा। आरोप है कि कोई भी वाहन चालक उसे घर पहुंचाने के लिए तैयार नहीं हुआ।
एक तरफ बेटी को खोने का असहनीय दर्द और दूसरी तरफ शव को घर ले जाने की मजबूरी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भी झकझोर दिया। जिस समय परिवार को सहारे की जरूरत थी, उस समय पिता को अपनी मृत बेटी के शव को लेकर सड़क पर भटकना पड़ा।
लोगों की पहल के बाद मिली एंबुलेंस
स्थानीय लोगों ने पिता की बेबसी देखकर उसे दोबारा सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था कर बच्ची के शव को घर भेजा गया। घटना के दौरान अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध होने की बात भी सामने आई, लेकिन तत्काल सेवा क्यों नहीं मिल सकी, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
निभा की मौत से परिवार की दुर्गा पूजा की खुशियां मातम में बदल गईं। घर में त्योहार की रौनक की जगह अब सन्नाटा और अपनों को खोने का दर्द है। यह घटना सवाल छोड़ जाती है कि आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचाना कितना जरूरी है।