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Bihar: मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर, बाढ़ पीड़ित रेल पटरी के किनारे बना रहे आशियाना

Mon, 11 Aug 2025 04:35 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर

सार

Bihar: रेल पटरी पर रह रहे लोगों ने बताया कि वे पिछले पांच दिनों से यहां हैं। बाजार से सूखा राशन खरीदकर खा रहे हैं और पुराने पॉलिथीन से तंबू बनाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। बारिश के दौरान टेंट से पानी टपकता है।
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रेल पटरी के बगल में बनाया आशियाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुंगेर जिले में गंगा नदी इस समय उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। बाढ़ की तबाही से ग्रामीण इलाकों के लोग अपने घर छोड़कर रेलवे पटरी के किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। परिवार के साथ बाढ़ पीड़ित पॉलिथीन शीट से टेंट बनाकर रह रहे हैं और मवेशियों को भी यहीं बांध रखा है।

जमालपुर–भागलपुर रेलखंड के बरियारपुर स्टेशन से लेकर ऋषिकुंड हाल्ट तक, और बरियारपुर से घोरघट तक कई स्थानों पर लोग पटरियों के पास अस्थायी रूप से बसे हैं। बरियारपुर प्रखंड के पड़िया गांव के दर्जनों बाढ़ पीड़ित बरियारपुर स्टेशन के पास डेरा जमाए हुए हैं।

रेल पटरी पर रह रहे लोगों ने बताया कि वे पिछले पांच दिनों से यहां हैं। बाजार से सूखा राशन खरीदकर खा रहे हैं और पुराने पॉलिथीन से तंबू बनाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। बारिश के दौरान टेंट से पानी टपकता है। अब तक कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी हाल जानने नहीं आया।

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पड़िया गांव के फंटूश मंडल की पत्नी अर्चना देवी ने बताया कि घर और बर्तन सभी पानी में डूब गए हैं। “बरियारपुर स्टेशन के पास बनी अतिरिक्त पटरी पर पिछले पांच दिनों से रह रहे हैं। रात में ट्रेन गुजरती है तो डर लगता है। मजबूरी में बच्चों को सूखा राशन खिलाना पड़ रहा है।

बबिता देवी ने कहा, “गंगा ने घर छीन लिया। पांच दिन से पटरी पर टेंट में रह रहे हैं। धूप से बचने के लिए प्रशासन ने पॉलिथीन तक नहीं दिया। वहीं, नरेश मंडल ने बताया कि उनके घर में छह फीट पानी भर गया है। “तीन साल पुराना पॉलिथीन लेकर पटरी पर टेंट लगाया है। आरपीएफ और जीआरपी पुलिस हटाने आती है। हम उनसे निवेदन करते हैं कि हमें रहने के लिए कोई छोटी-सी जगह दे दें। पानी उतरने तक यहीं रहना पड़ेगा।

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