बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, BSEB
- फोटो : Amar Ujala (Self)
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जिसे कभी 'टॉपर्स की फैक्ट्री' कहा जाता था, इन दिनों अपने प्रदर्शन को लेकर सवालों के घेरे में है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा वर्ष 2026 के इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम जारी होने से पहले एक बार फिर इस प्रतिष्ठित विद्यालय पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
2015 और 2016 में इसी स्कूल से थे टॉप-10 टॉपर
वर्ष 2015 से 2017 के बीच इस विद्यालय ने शिक्षा जगत में एक अलग पहचान बनाई थी। 2015 और 2016 में मैट्रिक परीक्षा के टॉप-10 में लगभग सभी छात्र इसी विद्यालय के थे। इसके बाद 2017 के इंटर परिणाम में भी विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों संकायों में विद्यालय के कई छात्र टॉप फाइव में शामिल हुए थे। इन शानदार उपलब्धियों के कारण यह विद्यालय पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया था।
2018 के बाद से प्रदर्शन में कमी
हालांकि, 2018 के बाद से प्रदर्शन में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिली। 2019 और 2020 में भी कुछ छात्रों ने टॉप सूची में जगह बनाई, लेकिन उनकी संख्या लगातार कम होती गई। वर्ष 2021 में स्थिति और चिंताजनक हो गई, जब केवल कला संकाय में एक छात्र ही टॉप फाइव में शामिल हो पाया। इसके बाद से इंटर परिणाम में विद्यालय का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। पिछले कुछ वर्षों में स्थिति ऐसी रही कि जिला स्तर पर कुछ छात्रों ने जरूर बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन राज्य स्तर की टॉप सूची में विद्यालय की उपस्थिति लगभग समाप्त हो गई। इससे शिक्षा प्रेमियों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ी है। इतना ही नहीं, विद्यालय के पास बेहतर संसाधन, अनुभवी शिक्षक और चयनित छात्र होने के बावजूद परिणाम में गिरावट कई सवाल खड़े कर रही है।
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इंटर परीक्षा परिणाम से उम्मीद जगी
अब वर्ष 2026 के इंटर परीक्षा परिणाम से पहले एक बार फिर उम्मीद जगी है कि यह प्रतिष्ठित संस्थान अपने पुराने गौरव को वापस हासिल करेगा। इस बार विद्यालय के पांच छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। विद्यालय प्रबंधन भी बेहतर परिणाम को लेकर आशान्वित है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सिमुलतला आवासीय विद्यालय फिर से अपनी “टॉपर्स फैक्ट्री” वाली पहचान बना पाता है या नहीं।