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Bihar Flood: लखीसराय एनएच-80 किनारे बाढ़ में डूबे ईंट भट्टे, कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका; जानें

Thu, 14 Aug 2025 04:10 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय

सार

Bihar: भट्ठा संचालक नवीन कुमार ने बताया कि हर साल बाढ़ आने से लाखों का नुकसान होता है। डूबी हुई ईंटों पर मिट्टी जम जाती है, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और ग्राहक इन्हें खरीदना पसंद नहीं करते।
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ईंट भट्टे पर इन दिनों बाढ़ के पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड में एनएच-80 किनारे स्थित दर्जनों ईंट भट्टे इन दिनों बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गए हैं। पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि कई भट्ठा संचालकों के ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें भी जलमग्न हो गईं। इस आपदा से भट्ठा मालिकों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर ईंट की बाजार दर पर पड़ने की आशंका है।

क्षेत्र के लगभग सभी ईंट भट्टे बाढ़ की चपेट में हैं। केवल वही भट्टे सुरक्षित हैं, जो सुरक्षा बांध या राष्ट्रीय राजमार्ग से ऊंचाई पर स्थित हैं। बाढ़ के कारण ईंट की आपूर्ति बेहद सीमित हो गई है, जिससे बाजार में कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं। मकान निर्माण कराने वालों के लिए ईंट खरीदना मुश्किल हो गया है, वहीं पशुपालकों को भी परेशानी हो रही है। बरसात में बथान पर कीचड़ होने से पशुओं के लिए भट्ठों की चिमनी से निकलने वाला उप-उत्पाद जरूरी होता है, लेकिन भट्टों के डूबने से इसकी आपूर्ति बाधित है।

भट्ठा संचालक नवीन कुमार ने बताया कि हर साल बाढ़ आने से लाखों का नुकसान होता है। डूबी हुई ईंटों पर मिट्टी जम जाती है, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और ग्राहक इन्हें खरीदना पसंद नहीं करते। वहीं, एक स्थानीय ईंट व्यापारी का कहना है कि बाढ़ में भट्ठा संचालकों को वास्तविक नुकसान कम होता है, लेकिन वे बारिश और बाढ़ का हवाला देकर कीमतें बढ़ा देते हैं। इस वजह से उपभोक्ताओं को महंगी ईंट खरीदनी पड़ती है।

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फिलहाल बाढ़ से प्रभावित भट्टों के कारण बाजार में ईंट की कमी और ऊंची दर दोनों की स्थिति बनी हुई है। कितनी अप्रत्याशित वृद्धि होगी, इसका अनुमान अभी लगाना कठिन है, लेकिन आम उपभोक्ताओं और निर्माण कार्य कराने वालों की परेशानियां बढ़ना तय है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया है, जबकि शहरी इलाकों में भी निर्माण लागत तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय प्रशासन ने नुकसान के आकलन और राहत कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी है, परंतु जब तक पानी घटता नहीं और भट्टों का संचालन दोबारा शुरू नहीं होता, तब तक बाजार में ईंट  की आपूर्ति सामान्य होने की संभावना कम है।

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