कल 2 नवंबर 2025 दिन रविवार की सुबह आठ बजे ‘चाय पर चर्चा’ आपके शहर मुंगेर में होगी। अमर उजाला पर कार्यक्रम लाइव टेलीकास्ट होंगे। उसके बाद दोपहर 12 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। फिर शाम 4 बजे से कार्यक्रम में सभी पार्टी के नेता/प्रत्याशियों, उनके प्रतिनिधि/समर्थकों और आम लोगों से सवाल-जवाब किए जाएंगे। ऐसे में आइये जानते हैं मुंगेर का इतिहास।
कैसा है इतिहास?
ऋषि मुकद्दर की तपोभूमि और बंगाल के नवाब मीर कासिम की राजधानी रहे मुंगेर का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व अद्वितीय है। जिले के उत्तरी छोर से उत्तरवाहिनी गंगा की धारा बहती है, जबकि दक्षिणी छोर श्रृंगी ऋषि पर्वतमाला से घिरा है। 1763 में बंगाल के नवाब मीर कासिम ने मुंगेर को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने यहां एक भव्य महल का निर्माण कराया, जो आज भी ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक के रूप में खड़ा है। ब्रिटिश काल से ही मुंगेर औद्योगिक दृष्टि से भी जाना जाता रहा है। आईटीसी फैक्ट्री और बंदूक फैक्ट्री आज भी इस विरासत को जीवित रखे हुए हैं। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र समाजवादियों और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का गढ़ माना जाता है।
मुंगेर जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं मुंगेर, जमालपुर और तारापुर। इनमें दो सीटों पर एनडीए का कब्जा है, जबकि एक सीट पर महागठबंधन काबिज है। लोकसभा की बात करें तो वर्ष 2019 और 2024 दोनों ही आम चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने जीत दर्ज की है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की प्रतिष्ठा वाली हॉट सीट
मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट इस बार सबसे चर्चित (हॉट) सीट बन गई है। इस सीट से बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एनडीए प्रत्याशी के रूप में पहली बार अपने गृह जिले से चुनाव मैदान में हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में वे अब तक खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं।
सम्राट चौधरी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है, क्योंकि तारापुर सीट उनके माता-पिता की राजनीतिक विरासत से जुड़ी है। उनके पिता शकुनी चौधरी और माता पार्वती देवी ने मिलकर लगभग 23 वर्षों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। ऐसे में तारापुर की सीट पर उनकी जीत न केवल भाजपा बल्कि पूरे एनडीए के लिए अहम मानी जा रही है।
इस सीट पर मुख्य मुकाबला राजद प्रत्याशी अरुण कुमार साह से है, जो बनिया समुदाय से आते हैं। वहीं जनसुराज पार्टी से स्थानीय चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार सिंह मैदान में हैं। तारापुर की राजनीति पर कुशवाहा, यादव, वैश्य, बिंद और अति पिछड़ा समुदायों का प्रभाव रहा है। इनमें कुशवाहा समाज सबसे अधिक संगठित माना जाता है, जो इस बार भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
तीन दशक बाद ईवीएम में दिखेगा कमल निशान
1995 के बाद से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए की सीट बंटवारे की प्रक्रिया में तारापुर सीट बीजेपी की सीधी उम्मीदवारी नहीं बन पाई कभी यह सीट समता पार्टी को मिली तो बाद में एनडीए में यह सीट शेयरिंग में जदयू के हिस्से में चली गई इसी वजह से इन दलों के चुनाव चिन्ह EVM में होते थे। 1995 के बाद वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कमल निशान पर बिहार सरकार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मैदान में है। तीन दशक के लंबे इस अंतराल के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कमल का निशान दिखेगा
2020 के नतीजे
| विधानसभा |
जीते हुए प्रत्याशी |
पार्टी |
| मुंगेर |
प्रणव कुमार यादव |
भाजपा |
| जमालपुर |
डॉ. अजय कुमार सिंह |
कांग्रेस |
| तारापुर |
राजीव कुमार सिंह |
जदयू |
यह है बड़े मुद्दे
मुंगेर विधानसभा का मुख मुद्दा खास महल का है। जो यहां विकास की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। वही जमालपुर विधानसभा में डकरा नाल पंप नहर परियोजना सबसे प्रमुख समस्याएं हैं जमालपुर शहर में नल जल योजना पूरी तरह से फ्लॉप है। जबकि तारापुर विधानसभा में नगर पंचायत क्षेत्र में नल और सड़क का निर्माण हरपुर पश्चिम बहीयार के सैकड़ो एकड़ खेतों में जल जमाव की समस्या किसान के खेतों तक सिंचाई प्रबंधन आदिवासी के उत्थान और विकास सहित अन्य मांग है।
सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम प्रस्तावित
- सुबह 8 बजे: असरगंज बस स्टैंड के पास, तारापुर, मुंगेर
- दोपहर 12 बजे: पोलो मैदान, मुंगेर।
- शाम 4 बजे: किला परिसर क्षेत्र एसडीओ ऑफिस के समीप
विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com, अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप 'सत्ता का संग्राम' से जुड़े कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे। 'सता का संग्राम' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।