जमुई की हवा इन दिनों सिर्फ मिट्टी की महक नहीं, बल्कि चुनावी जोश से भी सराबोर है। धान की बालियों के बीच अब राजनीति की फुसफुसाहट गूंज रही है, चौपालों पर बहसों की गर्मी है, गलियों में नारों की गूंज है, और हर चेहरे पर एक ही सवाल लिखा है, “किसके हाथ लगेगी सत्ता की चाबी?” जब ‘अमर उजाला’ का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ जमुई की धरती पर पहुंचा, तो लगा जैसे लोकतंत्र की सबसे सशक्त धड़कन यहीं धड़क रही हो। जनता तैयार है, अपने वोट से बिहार की नई कहानी लिखने के लिए उम्मीद, बदलाव और विश्वास की कहानी।
पिंटू कुमार ने कहा, “हम सरकारी नौकरी कर रहे हैं क्योंकि यहां और कोई विकल्प नहीं है। प्राइवेट नौकरी का मौका नहीं मिलता, इसलिए मजबूरी में सरकारी नौकरी की ही तैयारी करनी पड़ती है। इस बार हम नोटा दबाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “यहां की सड़कें बहुत खराब हैं। इसकी वजह से हर दिन जाम लगता है। अगर कोई बीमार व्यक्ति जाम में फंस जाए, तो उसकी जान भी जा सकती है क्योंकि वह वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंच पाता।”
राजकुमार ने कहा, “यहां पर एनडीए का प्रभाव ज्यादा है। कोई बड़ा नेता नहीं है। रोजगार की समस्या बहुत बड़ी है और कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगी है। यूपी आगे बढ़ रहा है, लेकिन बिहार अभी पीछे है।” उन्होंने आगे कहा, “बिहार में लोग पढ़े-लिखे हैं, लेकिन नौकरी न मिलने के कारण दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, जहां उन पर कई बार हमला भी होता है। अगर यहां प्राइवेट कंपनियां आएंगी, तो लोगों को रोजगार मिलेगा।”
पीयूष कुमार ने कहा, “हमें लगता है कि एनडीए की सरकार दोबारा बनेगी। नीतीश कुमार के आने के बाद यहां काफी सुधार हुआ है। अब पहले जैसा भ्रष्टाचार नहीं है। पहले बूथ कैप्चरिंग होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होता।”
स्थानीय निवासी नीतीश कुमार ने कहा, “बिहार में नौकरी या रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। इस बार हम पहली बार वोट देने जा रहे हैं, इसलिए उम्मीद है कि इस बार चुनाव में शिक्षा, रोजगार और विकास पर बात होनी चाहिए। लेकिन लोग इन मुद्दों की बजाय वोट चोरी जैसी बातों पर ध्यान दे रहे हैं।”
सौरव कुमार ने कहा, “सरकार को शिक्षा मुफ्त कर देनी चाहिए। अगर हम पढ़-लिख लेंगे तो खुद कमाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं। आरजेडी के नेता इस बार नौकरी देने की बात कर रहे हैं।”