बिहार के मुंगेर जिले में हिंसा के मामले में पांच थानाध्यक्षों (एसएचओ) पर गाज गिरी है। इन पांचों एसएचओ को दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के दौरान कथित रूप से श्रद्धालुओं पर ज्यादती करने, उनका अपमान करने और प्रशासन व्यवस्था संभालने में ढिलाई बरतने के आरोप में पद से हटाया गया है।
मुंगेर में प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कोतवाली, मुफ्फसिल, काशीमबाजार, बासुदेवपुर और पूरब सराय थाने के एसएचओ को पद से हटा दिया गया है।
बता दें कि 26 अक्तूबर की देर रात मूर्ति विसर्जन के दौरान गोली चली थी, जिसमें 19 वर्षीय अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी। वहीं कई अन्य लोग घायल हो गए थे। इसके बाद 29 अक्तूबर को इस घटना के विरोध में फिर बवाल हो गया। आक्रोशित लोगों ने एसपी-डीएम को हटाने की मांग को लेकर पूरब सराय थाने में आग लगा दी थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने मुंगेर के हालात को देखते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही चुनाव आयोग ने 29 अक्तूबर की घटना में जांच के आदेश दिए हैं। मगध डिवीजनल कमिश्नर असंगबा चुबा को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के लिए कहा गया था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मुंगेर घटना में स्थिति पर काबू पाने के लिए एसएसओ ने तत्परता नहीं दिखाई थी। पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वक्त रहते सख्ती बरतने पर हिंसक घटना से बचा जा सकता था।
अब तक 16 प्राथमिकी दर्ज
बता दें कि मुंगेर हिंसा मामले में अब तक 16 प्राथमिकी दर्ज की गईं हैं, जिनमें छह पुलिसकर्मियों समेत 160 लोगों को नामजद किया गया है। वहीं 3,000 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।