मन्नत पूरी होने के लिए चुनरी बांधते श्रद्धालु।
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माता ने यहां किया था चंड-मुंड का वध
मुख्य पुजारी मुन्ना द्रिवेदी ने कहा कि मार्कंडेय पुराण के अनुसार चंड-मुंड नाम के असुर का वध करने के लिए देवी यहां आई थीं तो चंड के विनाश के बाद मुंड युद्ध करते हुए इसी पहाड़ी में छिप गया था। यहीं पर माता ने मुंड का वध किया था। इसलिए यह माता मुंडेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हैं।
526 ईसवी पूर्व पाया गया यह मंदिर
यहां मिले शिलालेख से पता चलता है कि 526 ईसवी पूर्व यह मंदिर पाया गया। बिहार सरकार की ओर से भक्तों की सुविधा लिए यहां पर विश्रामालय, रज्जुमार्ग आदि का निर्माण कराया जा रहा है। पहाड़ पर स्थित मंदिर में जाने के लिए एक सड़क का निर्माण कराया गया है, जिस पर छोटे वाहन सीधे मंदिर द्वार तक जा सकते हैं। मंदिर तक जाने के लिए 560 सीढ़ियों का रास्ता भी बनाया गया है। वहीं, बिहार राज्य पर्यटन निगम की बसें प्रतिदिन पटना से आते हैं, जो पहाड़ी के नीचे बसे गांव रामगढ़ तक जाती हैं।